श्रीडूंगरगढ़ टुडे 29 अक्टूबर 2025
दुलचासर के मीठिया कुंआ चौपाल स्थित माहेश्वरी भवन में चल रही भागवत कथा गुरुवार को शोभायात्रा के साथ संपन्न होगी। कथा के छठे दिन बुधवार को भगवान की अनेक लीलाओं में से श्रेष्ठतम लीला रास लीला का वर्णन करते हुए कथावाचिका महामंडलेश्वर साध्वी करूणागिरी महाराज ने बताया कि रास तो जीव का शिव के मिलन की कथा है। यह काम को बढ़ाने की नहीं काम पर विजय प्राप्त करने की कथा है। इस कथा में कामदेव ने भगवान पर खुले मैदान में अपने पूर्व सामर्थ्य के साथ आक्रमण किया है, लेकिन वह भगवान को पराजित नही कर पाया। उसे ही परास्त होना पड़ा है। रास लीला में जीव का शंका करना या काम को देखना ही पाप है। गोपी गीत पर बोलते हुए कहा कि जब तब जीव में अभिमान आता है, भगवान उनसे दूर हो जाता है लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते है, उसे दर्शन देते है।
कथावाचिका ने भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मणि के साथ संपन्न हुआ। इस कथा में समझाया गया कि रुक्मणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी है और वह नारायण से दूर रह ही नहीं सकती। यदि जीव अपने धन अर्थात लक्ष्मी को भगवान के काम में लगाएं तो ठीक, नहीं तो फिर वह धन चोरी द्वारा, बीमारी द्वारा या अन्य मार्ग से हरण हो ही जाता है। धन को परमार्थ में लगाना चाहिए और जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वत: ही प्राप्त हो जाती है। श्रीकृष्ण भगवान व रुक्मणि के अतिरिक्त अन्य विवाहों का भी वर्णन किया गया। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रोतागण पहुंचे। गुरुवार को सात दिवसीय कथा सम्पन्न होगी और समापनावसर पर शोभायात्रा निकलेगी।










