श्रीडूंगरगढ़ टुडे 1 नवम्बर 2025
वर्तमान में बेटियों के प्रति समाज में जागृति आई हैं। अब बेटियों को भी बेटों के समान समझा जाने लगा हैं। जो देश व समाज के लिए अभिनव पहल हैं। ऐसा ही बेटा-बेटी समानता का सन्देश सूडसर के एक परिवार ने रूढ़िवादी परंपरा को तोड़ते हुए अपनी लाडली बेटियों की शादी की रस्मों को वैसे ही निभाया,जैसे बेटों की निभाई जाती है। दुल्हन के पिता त्रिलोकचंद कटारिया ने शनिवार को अपनी लाडली बेटिया रेखा व मोनिका को घोड़ी पर बिठाकर बिंदोरी निकाली और ‘बेटे-बेटी एक समान हैं’ का संदेश दिया।
सूडसर निवासी कटारिया परिवार ने भी समाज की रूढ़िवादी परंपरा को त्यागते हुए बेटी रेखा और मोनिका की सोमवार को होने वाली शादी से पहले उसके सारे रस्म-रिवाज लडकों की भांति किए। दोनों बेटियों को घोड़ी पर बैठाकर बिंदोरी निकाली. परिजनों ने रेखा और मोनिका को घोड़ी पर बैठाकर बैंड बाजे के साथ रस्म निभाया। जिसमें सभी परिजनों ने नाच-गाकर जश्न मनाया. वहीं शादी से पहले परिवार द्वारा निभाई जा रही रस्मों को देखकर दोनो गदगद नजर आ रही हैं।दोनों दुल्हनों ने बताया की उनके परिवार में बेटियों को पूरा मान और सम्मान मिलता है. परिवार ने कभी भी उसके और उसके भाइयों के बीच कोई भेदभाव नहीं किया है. उसकी शादी में लड़कों के जैसे ही पुरे रस्म-रिवाज निभाया जा रहा है। दुल्हन के ताऊजी रिकाराम कटारिया,टेऊ-सूडसर ग्राम सेवा सहकारी समिति के उपाध्यक्ष चंपालाल कटारिया ने बताया कि समाज के बदलते परिवेश और शिक्षा के विकास के कारण अब रूढ़िवादी परंपराओं को जनता धीरे-धीरे तिलांजलि देने लगी है।जहां पहले बेटियों को समाज में बोझ समझा जाता था, वहीं अब शिक्षा और जागरुकता की वजह से जनता की सोच में बदलाव देखने को मिल रहा है। आधुनिक दौर में शिक्षा के प्रसार-प्रचार से समाज में आई जागरूकता से बेटियों को भी बेटों के बराबर सम्मान मिलने लगा है।





