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योग धरातल पर लागू हो” पुस्तक का विमोचन, योगाचार्य ओम कालवा के निःस्वार्थ सेवा भाव को निजी सहायक शर्मा ने सराहा

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श्रीडूंगरगढ़ टूडे 9 नवम्बर 2025

राष्ट्रीय योग क्रांति अभियान की 84-पेजीय फाइल में योग को धरातल पर लाने का संपूर्ण रोडमैप, आयुष मंत्रालय और जन-मानुष के के लिए 84 सवालों के सटीक जवाब।

श्रीडूंगरगढ़ (बीकानेर) “सारा खेल सुखी और निरोगी जीवन का है,” इसी ध्येय वाक्य के साथ ‘राष्ट्रीय योग क्रांति अभियान’ भारत की प्राचीन योग संस्कृति को जन-जन तक पहुँचाने के लिए कार्यरत है। अभियान के इसी सपने को साकार करती पुस्तक “योग धरातल पर लागू हो” का विमोचन  रविवार शाम स्टेशन रोड स्थित संजीवनी फिजियोथेरेपी क्लिनिक बीकानेर में किया गया। शिक्षा निदेशालय बीकानेर निजी सहायक योग प्रेमी योगगुरू दीपक शर्मा जी ने अपने कर-कमलों से इस महत्वपूर्ण पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने अभियान के राष्ट्रीय प्रभारी और ख्याति प्राप्त योगाचार्य ओम प्रकाश कालवा और उनकी पूरी टीम को इस भागीरथी प्रयास के लिए बधाई दी।

आपकी मेहनत और जज्बे को सलाम” :

पुस्तक विमोचन के दौरान निजी सहायक दीपक शर्मा जी ने योगाचार्य कालवा के प्रयासों की खूब प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “आप और आपकी पूरी टीम जो निस्वार्थ भाव से योग सेवा कर रही है, आपकी मेहनत, लगन और जज्बे को सलाम। आपकी यह दीर्घामी सोच निश्चित रूप से समाज को एक नई दिशा देगी।” उन्होंने इस अमूल्य कार्य के लिए ओम कालवा और उनकी टीम का आभार व्यक्त किया। पुस्तक विमोचन के साक्षी बने सोशल मीडिया पर मशहूर सपाटे किंग राजस्थानी छोटा टार्जन योगानंद कालवा, राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे लाला राजस्थानी लालचंद जाखड़ रीड़ी, योग प्रशिक्षक बलराम बेनीवाल, मोहित स्वामी आदि

क्यों जरूरी है यह पुस्तक?

योगाचार्य ओम प्रकाश कालवा ने पुस्तक के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव चरम पर है। यदि मानव का वास्तविक कल्याण करना है और वर्तमान व आने वाली पीढ़ियों को बचाना है, तो भारतीय योग संस्कृति को धरातल पर लागू करना ही होगा।उन्होंने बताया, “तनावपूर्ण जीवन शैली से निकलकर मानव जीवन को सार्थक बनाने के लिए मनुष्य को अपनी दैनिक दिनचर्या में योग को शामिल करना ही पड़ेगा।”

84 सवालों के 84 सटीक जवाब

योगाचार्य कालवा ने बताया कि उनकी टीम लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर इस मिशन पर काम कर रही है। यह 84-पेज की पुस्तक, जो एक फाइल के रूप में है, उस लंबे शोध और इंतजार का फल है। इसमें उन 84 ज्वलंत सवालों के 84 सटीक जवाब तैयार किए गए हैं, जो आयुष मंत्रालय या किसी भी नीति-निर्माता के मन में हो सकते हैं कि “योग को धरातल पर लागू क्यों किया जाए?”
इस फाइल में योग के इतिहास, इसके वैज्ञानिक स्वरूप, स्वास्थ्य में इसकी भूमिका से लेकर योग प्रशिक्षकों के लिए स्थाई रोजगार, सभी राज्यों में योग बोर्ड का गठन और योग को धरातल पर लागू करने की ठोस कार्ययोजना जैसे हर पहलू पर सटीकता से जवाब दिए गए हैं।
यह पुस्तक ‘राष्ट्रीय योग क्रांति अभियान’ के उस लक्ष्य को मजबूती से सामने रखती है, जिसका सपना “योग धरातल पर लागू हो” है।

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