श्रीडूंगरगढ़ टुडे 10 नवम्बर 2025
मैं जब कभी आत्ममंथन करती हूँ,
तो कुछ जगह पर लोग स्वार्थी नजर आते हैं।
अपने फायदे के लिए लोग सही को गलत ठहरा देते हैं,
मेरा मानना है कि इंसान को उसूल का पक्का होना चाहिए, लोगों के दबाव में अपना फैसला नहीं बदलना चाहिए। कुछ लोग सही को गलत ठहरा देते हैं ये उनकी नादानी है,हम अच्छा नही करे ये अपने साथ बेईमानी है।
न जाने लोग सही को गलत क्यों ठहरा देते हैं।
आज चारों तरफ स्वार्थपरता व्याप्त है,
मनुष्य-मनुष्य साथ देता नहीं है।
मरने के बाद 100 लोग कंधा देने आ जाते हैं पर जीवित व्यक्ति का एक पल भी साथ नहीं देते हैं।
मरने के बाद सब लोग तारीफ करते हैं,
पर जिन्दा आदमी को उलाहना ही मिलती है।
जिसके पास दया का भाव है वह सब पर दया करता है, पर बुरे लोग इसको भी कमजोरी समझते हैं,
ये कमजोरी नहीं एक अच्छे इंसान के अच्छे संस्कार है,
और ऐसे इंसान के लिए ये स्वार्थी दुनिया बेकार है।
मैं जब महसूस करती हूँ तो मुझे लगता है, लोग सही को गलत ठहरा देते न जाने इस संसार में ऐसा क्यूँ होता है।हंस को मोती नहीं आजकल कोओं को मोती मिलता है। जब ऐसा होते में देखती है तो तो मुझे हँसी आती है,
ये बातें मुझे रति भर भी नही सुहाती है।
न जाने लोग सही को गलत कैसे ठहरा देते हैं। पहले बेईमान लोगों को कहा जाता था भगवान से डरो,
आजकल ऐसा कहना बन्द हो गया है,
मुझे लगता है भगवान भी ऐसे लोगों के साथ हो गया है।
सलाह यही है अपने अपने काम से काम रखो, लोग जो भी कहते हैं उसको नजर अन्दाज करो।।





