श्रीडूंगरगढ़ टुडे 20 नवम्बर 2025
आज इस युग में हम देखते है किसी के पास समय नहीं है। अरे! दूसरे की बात छोड़ो अपने लिए भी समय नहीं है। मनुष्य को प्रतिदिन कम से कम अपने से मिलने के लिए 15 मिनट अवश्य निकालने चाहिए जिससे कि हम पहचान सकें हमारी क्या अच्छाइयाँ है और क्या बुराइयाँ है और हम ईश्वर से भी बात कर सकें। खुद को जानना, दूसरों को जानने से ज्यादा कठिन है। अकसर हम दूसरे की बात करने में समय खराब करते है और वह हमारे किसी काम भी नहीं आती है। अतः उस समय अपने आपको बेहतर कैसे बनाए इस बात के बारे में सोचना चाहिए। ‘कर भला तो हो भला’ इस उक्ति का ध्यान में रखते हुए जीवनयापन करना चाहिए। इस प्रकार जीवन जीने में बाधाएँ तो अनेक आती है पर दृढ़ निश्चय मनुष्य उन बाधाओं को अपने प्रयत्नों से हटाते हुए अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होता रहता है। खुद से मिलने के के लिए क्या करना चाहिए ?
इस प्रश्न का उत्तर देना आसान नहीं है क्योंकि एक व्यक्ति के जीने का, सोचने का तरीका अलग- अलग होता है जो बात किसी की नज़र में सही है तो किसी की नज़र में गलत भी सकती है
फिर भी इस प्रश्न का उत्तर ढूंढने का हम प्रयास कर सकते हैं।
1 अपने इन्द्रियों के वेग को वश में रखें।
2.व्यर्थ की बातों से हमेशा दूर रहें
3.अपनी आकांक्षाओं को सीमित रखें।
4.अपनार्थ का जीने वाले मनुष्य बनें।
5.योग करने में ध्यान दें।
6.लोगों की व्यंग्य भरी बातों से न घबराएँ।
7.सकारात्मक सोच रखें ।
8.मितव्ययी व मितभाषी बने ।
9.सच को स्वीकार करना सीखें।
10.खुद से प्रेम करें।
11.चिंता नहीं चिंतन करें ।
12.ईश्वर से प्रेम करें।
13.फल पर नहीं कर्म पर ध्यान दें।
14 न अत्याचार करें न सहन करें ।
15.खुद को सबमें देखे सबसे प्रेम हो जाएगा।
16. जिन व्यक्तियों की बातें आपको पसन्द न हो उनसे दूर रहना सीखें।
17.जीवन में जो काँटे है उन्हें शूल नहीं फूल समझे।
हम सब उपर्युक्त बातों को थोड़ा भी मान लेंगे तो जो लोग हमें कष्ट देना, चाहते हैं हम उन्हें मौन रहकर भी हरा देगें।”जिन्दगी जीने का नाम है डरने का नहीं”





