श्रीडूंगरगढ़ टुडे 30 नवंबर 2025
योग और आयुर्वेद दोनों ही एक ही प्राचीन भारतीय ज्ञान की जड़ें हैं जो समग्र स्वास्थ्य पर केन्द्रित हैं। आयुर्वेद एक चिकित्सा प्रणाली है जो शरीर और मन के संतुलन के लिए आहार, जड़ी-बूटियों और जीवनशैली में बदलाव पर जोर देती है जबकि योग मन, शरीर और आत्मा को निर्मल बनाता है। योग और आयुर्वेद का मानना है कि उपचार केवल शारीरिक दोषों और मानसिक गुणों के संतुलन से ही हो सकता है। दोनों ही अभ्यास प्राकृतिक तरीकों से शरीर को शुद्ध करने पर जोर देते हैं।
आयुर्वेद और योग के बीच संबंध –
योग, आयुर्वेद और उसके उच्चतर अनुप्रयोगों के लिए आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक आधार प्रदान करता है। आयुर्वेद और योग, दोनों ही चिकित्सा और स्वास्थ्य लाभ के एक व्यापक और गहन दृष्टिकोण के लिए आवश्यक है, लेकिन आयुर्वेद चिकित्सा का आधार प्रदान करता है और योग आध्यात्मिक उद्देश्य और अभ्यास प्रदान करता है।
आयुर्वेद के पांच मुख्य सिद्धान्त-
पंच महाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) दिनचर्या (दैनिक दिनचर्या), ऋतुचर्या (मौसमी दिनचर्या ) और आहार है। ये सिद्धान्त शारीरिक, मानसिक और आत्मिक कल्याण बनाए रखन के लिए जीवनशैली को संतुलित करने पर ध्यान केन्द्रित करते हैं।
“योग जगत का सार है,
सद्गुण लिए हजार।
इसकी महिमा से सदा,
सुख पावत संसार ।।
योग नहीं यह कुंजिका,
औषधि है यह एक।
इसके नित व्यवहार से,
मिटते रोग अनेक ।।
” योग वह चाबी है, जो हमें हमारे
भीतर की दुनिया से जोड़ती है।”





