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प्रथम शिक्षिका सावित्री बाई की जयन्ती✍️✍️

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(नारी सशक्तीकरण)

“नारी अबला नहीं सबला है।”

वह घर की रानी, समाज की शान है, शक्ति और प्रेरणा का स्त्रोत है, जो शिक्षा से ज्ञान और स्वावलम्बन से सम्मान पाती है और हर क्षेत्र में बराबर हिस्सेदारी मांगती है ताकि वह अपनी आवाज बुलन्द कर सके और देश-समाज की प्रगति में अग्रणी बन सके, क्योंकि उसकी उड़ान में ही राष्ट्र का भविष्य है।

” मजबूत राष्ट्र की पहचान है नारी”

यह कथन बिल्कुल सत्य है, क्योंकि सशक्त और शिक्षित नारी ही, परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार है; वह शिक्षा, अर्थ, राजनीतिः और सामाजिक सुधारों में नेतृत्व कर राष्ट्र को आर्थिक और नैतिक रूप से मजबूत बनाती है, जिससे एक विकसित और समृद्ध भविष्य की नींव पड़ती है जैसाकि भारत में महिला सशक्तीकरण की विभिन्न योजनाओं और बढ़ती महिला भागीदारी से स्पष्ट है।

नारी सशक्तीकरण के पहलू –

शिक्षा और संस्कार आर्थिक आत्मनिर्भरता
सामाजिक और राजनीतिक नेतृत्व’
सामाजिक और नैतिक चेतना ।

नारी के प्रति लोगों की सकारात्मक व नकारात्मक सोच-

1.सकारात्मक सोच- (Positive Thinking)

🔹बेटियों को पढ़ाकर आत्मनिर्भर बनाना ।

🔹मर्यादित स्वतन्त्रता प्रदान करना।

🔹बेटी का सर्वांगीण विकास ।

🔹पढ़ी लिखी बहु लाना।

🔹अपनी बेटी और बहू में कोई अन्तर न रखना।

🔹सरकारी नौकरी, व्यापार आदि करने के लिए उन्हें प्रेरित करना।

2.नकारात्मक सोच – (Negative Thinking)

🔹पुरुष प्रधान समाज होने के कारण महिलाओं को सम्मान न देना।

🔹महिलाओं को चहारदीवारी में कैद रखना।

🔹सपनों की ऊँची उड़ान न भरने देना ।

🔹व्यंग्य के बाणों द्वारा महिलाओं को विक्षिप्त कसा।

🔹बेमतलब की रोक टोक लगाना।

🔹अपशब्दों का प्रयोग करते हुए महिलाओं की प्रतिभा का हनन करना।

ऐसी सोच का सामना’ करते हुए भी महिलाएं हार नहीं मानती है क्योंकि वे त्याग, तपस्था, सहनशीलता की परिचायक है।

” आप सागर में एक बूंद नहीं है, आप एक बूंद में पूरा सागर है। कई दर्द के पहाड़ तुझपर टूटते देखा, पर तुझे कभी नहीं टूटते देखा। माँ दुर्गा का रूप है नारी,. ममता की मूरत है नारी ॥”

निष्कर्ष

नारी शक्ति सिर्फ राष्ट्र निर्माण में भाग ही नहीं लेती बल्कि उसका नेतृत्व भी करती है इसलिए नारी का सशक्तीकरण ही एक मजबूत राष्ट्र की सबसे सशक्त नींव है। जब महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ती है, तो पूरा समाज और राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है।

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