श्रीडूंगरगढ़ टुडे 8 जनवरी 2026
विद्यार्थी जीवन बड़ा अनूठा,
मन न जाने क्यूँ रहता रुठा-रठा।
किसी की कही बात बुरी लगने लगती है,
न जाने ऐसी स्थिति मन की क्यूँ रहती है।
पढ़ने को मन तो करता है, पर न जाने क्यूँ भटक जाता है,
फिर किताब में जो लिखा है, खोया-खोया नज़र आने लगता चुप बैठना बुरा लगता है,पर शिक्षक का कहना मानना पड़ता
सर्दी में सोना अच्छा लगता है, फिर भी रोज स्कूल आना पड़ता
हर एक दिन छह घण्टे पढ़ना पड़ता है,
मन तो नहीं चाहता फिर भी करना पड़ता हैं।
फिर मन सोचता है पढ़ने में ही फायदा है, बड़ों की हर बात माने यही तो कायदा है।
जानाना बहुत कुछ है क्योंकि जिज्ञासु प्रवृत्ति है,
मौन रूप से भी ज्ञान ग्रहण करने में मेरी स्वीकृति है।
अपने मन को हर पल वश में रखना है,
अहंकार को मेरे मन से हमेशा दूर रखना है।
ऊँचाइयों को छूना है आसमान तक जाना है,
मुझे इस जगत में अवश्य ही नाम कमाना है।
मुझे अपने प्रयासों से घर, समाज रोशन करना है,
मुझे अपने कर्मों से मोक्ष को भी प्राप्त करना है।




