श्रीडूंगरगढ़ टुडे 12 जनवरी 2026
स्वामी विवेकानंद ने विद्यार्थियों के लिए अनेक प्रेरणादायक विचार दिए हैं, जो आज भी उतने ही प्रासंगिक है। उनके प्रमुख संदेश निम्नलिखित हैं-
1.आत्मविश्वास और आत्मबल –
“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।”
स्वयं पर विश्वास रखें। आत्मविश्वास ही सफलता की पहली सीढ़ी है।
2.शिक्षा का सही अर्थ –
विवेकानन्द जी के अनुसार शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं हैं, बल्कि “मनुष्य में निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति हैं।”
शिक्षा से चरित्र निर्माण, आत्मनिर्भरता और विवेक का विकास होना चाहिए।
3.एकाग्रता –
विद्यार्थियों के लिए एकाग्रता अत्यंत आवश्यक है। एक समय में एक लक्ष्य पर पूरा ध्यान केन्द्रित करने से असाधारण परिणाम मिलते हैं।
4.परिश्रम और धैर्य-
सफलता के लिए निरन्तर प्रयास और धैर्य जरूरी है। असफलता से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उससे सीख लेनी चाहिए
5.चरित्र निर्माण –
सच्चाई, ईमानदारी, अनुशासन और सेवा-भाव को जीवन में अपनाना चाहिए। मजबूत चरित्र ही महान व्यक्तित्व की पहचान है।
6.निर्भीकता –
स्वामी जी भय को सबसे बड़ा शत्रु मानते थे। विद्यार्थियों को निर्भय होकर अपने विचार व्यक्त करने चाहिए और चुनौतियों का सामना करना चाहिए।
7.लक्ष्य के प्रति समर्पण –
जीवन में स्पष्ट लक्ष्य रखें और उसके लिए पूरे मन, बुद्धि और आत्मा से प्रयास करें
8.सेवा और राष्ट्रप्रेम-
शिक्षा का उद्देश्य समाज और राष्ट्र की सेवा होना चाहिए। अपने ज्ञान और शक्ति का उपयोग दूसरों के कल्याण के लिए करना चाहिए।
9.शारीरिक और मानसिक शक्ति:
“युवाओं में लोहे जैसी मांसपेशियां और फौलादी नसें हैं, जिनका हृदय वज्र तुल्य संकल्पित है।”
निष्कर्ष-
स्वामी विवेकानंद का संदेश विद्यार्थियों को आत्मविश्वासी, चरित्रवान, कर्मठ और राष्ट्रसेवक बनने की प्रेरणा देता है। यदि विद्यार्थी उनके विचारों को अपनाएँ तो न केवल वे सफल विद्यार्थी बल्कि श्रेष्ठ मानव भी बन सकते हैं।
“जो तुम सोचते हो, वो बन जाओगे, यदि तुम खुद को कमजोर सोचते हो तो कमजोर और ताकतवर सोचते हो तो ताकतवर बन जाओगे





