श्रीडूंगरगढ़ टुडे 19 जनवरी 2026
ये दो शब्द दिखने में तो छोटे हैं,
पर इन शब्दों का प्रभाव बहुत गहरा है।
शब्द मधुर होने पर,
शत्रु भी मित्र बन जाता है,
असंभव कार्य भी संभव हो जाता है।
शब्द कटु होने पर,
अच्छा भला इंसान भी मन से उतर जाता है।
व्यवहार यदि अच्छा है तो,
पराये भी अपने बन जाते हैं।
मदद को बुलाना नहीं पड़ता है,
स्वत: ही आ जाते हैं।
शब्द और व्यवहार अच्छा बनाने के लिए,
मेहनत नहीं करनी पड़ती,
बस धैर्य रखना पड़ता है।
सहनशील बन रहना पड़ता है,
मौन धारण कर हर रिश्ता निभाना पड़ता है।
ऐसा करने से हम कंचन बन जाते हैं।
हमारे जीवन में जो शूल है वे भी फूल बन जाते हैं।
शब्दों में मिठास, जीवन में जगाती आगे बढ़ने की आस, अच्छा व्यवहार ला देता व्यक्तित्व में निखार ।
ये दोनों शब्द हमें बना देते प्रभावी, हम पर कोई न हो पाता हामी ॥









