श्रीडूंगरगढ़ टुडे 20 जनवरी 2026
कुछ बच्चे मजदूरी के लिए विवश हो जाते हैं,
क्योंकि घर वाले उनका साथ नहीं दे पाते है।
वे पढ़ना चाहते हैं,
पर घरवाले पढ़ा नहीं पाते हैं।
हमारे देश में बालश्रम एक विकट समस्या है,
बच्चों का इससे बुरा हाल हैं।
जिनके पास सुविधाएँ है, वे पढ़ते नहीं,
जो असुविधाग्रस्त है, उनके लिए पढ़ाई नहीं।
कल में स्कूल बस से आ रही थी,
सहसा मैंने देखा, दो बच्चे चौकी पर बैठे थे,
तन ढकने को कपड़ा नहीं, खाने को रोटी नहीं,
क्या कर सकते हैं? मन बड़ा दुःखी हुआ,
ऐसे बच्चों के बारे में हमें कुछ सोचना चाहिए,
समाज के लोगों को मिल एक कदम उठाना चाहिए।
इन्हें भी ढंग से रहने का अधिकार मिले,
पढ़ने के लिए उचित अवसर मिलें,
खाने को दो वक्त की रोटरी मिलें,
बालश्रम इन्हें न करना पड़े।
इन बच्चों को भी सिर उठाकर जीने का अधिकार हो,
इन बच्चों की जिन्दगी भी मिसाल हो।
बालश्रम को हटाना होगा,
शिक्षा का माहौल बनाना होगा, आज कल के बच्चे कल का भविष्य है,स्वीकार करना होगा।
मरने के बाद हजारों की भीड़ इकट्ठी हो जाती है,
जीवित लोगों की मदद के लिए हमें आगे आना होगा









