श्रीडूंगरगढ़ टुडे 24 जनवरी 2026
कोटासर गांव के भोमियाजी दादोसा मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन शनिवार को श्रद्धालुओं को ईश्वर भक्ति का महत्व बताया

कथावाचक पंडित राकेश भाई पारीक ने बताया कि भक्त प्रहलाद और ध्रुव की प्रेरणादायक कथाओं में संघर्ष, आस्था और भक्ति की गहराई झलकती है। उन्होंने कहा कि भक्ति मार्ग पर चलना जितना सरल दिखता है, उतना है नहीं। केवल वही इस मार्ग पर टिक पाता है, जिसमें सच्ची श्रद्धा और धैर्य होता है। उन्होंने भक्त प्रहलाद का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें पहाड़ से गिराया गया, समुद्र में फेंका गया, विष दिया गया और कालकोठरी में बंद किया गया, लेकिन उनकी भक्ति में कोई कमी नहीं आई। इसलिए भगवान ने नरसिंह अवतार लेकर अपने भक्त की रक्षा की।

उन्होंने बताया कि प्रहलाद को गर्भ में ही ब्रह्मज्ञान प्राप्त हो गया था। जैसे अभिमन्यु ने चक्रव्यूह भेदन की विद्या मां के गर्भ में सीखी, वैसे ही प्रहलाद भी अपनी माता के माध्यम से संस्कारवान बने। कथा में ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों को धर्म व आध्यात्म का ज्ञान बचपन से ही दिया जाना चाहिए। ताकि वह जीवन भर उसका ही स्मरण करता रहें। माता-पिता की सेवा व प्रेम के साथ समाज में रहने की प्रेरणा ही धर्म का मूल है।
अच्छे संस्कारों के कारण ही ध्रुव जी को पांच वर्ष की आयु में भगवान का दर्शन प्राप्त हुआ। इसके साथ ही उन्हें 36 हजार वर्ष तक राज्य भोगने का वरदान प्राप्त हुआ था। ऐसी कई मिसालें हैं, जिससे सीख लेने की जरूरत है।आज भी आकाश में चमकता ध्रुव तारा उनकी भक्ति और तपस्या का प्रतीक है।











