श्रीडूंगरगढ़ टुडे 24 जनवरी 2026
जैन धर्म की तप, त्याग और आत्मसंयम की परंपरा का पालन करते हुए कस्बे में एक जैन महिला ने संलेखना विधि के तहत संथारा ग्रहण किया। कालू बास निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अशोक बैद की माता एवं माणिकचंद बैद की पत्नी रेवती देवी बैद ने आज सुबह 7:28 बजे संथारा स्वीकार किया।
आचार्य महाश्रमण की आज्ञा से साध्वी संगीतश्री एवं साध्वी डॉ. परमप्रभा ने रेवती देवी की स्वयं की तथा परिजनों की सहमति से, श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति में तिविहार संथारे का प्रत्याख्यान करवाया।
संथारा ग्रहण के बाद अशोक बैद के निवास पर धार्मिक वातावरण बन गया है। घर में भजनों और जप का क्रम शुरू हो गया है और बड़ी संख्या में समाजजन दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
जैन धर्म में संलेखना को जीवन के अंतिम क्षणों में आत्मशुद्धि और आत्मोत्थान का मार्ग माना जाता है, जिसे श्रद्धा और संयम के साथ स्वीकार किया जाता है।




