श्रीडूंगरगढ़ टुडे 25 जनवरी 2026
श्री क्षत्रिय युवक संघ के संस्थापक तनसिंहजी की 102वीं जयंती रविवार को धर्मास (श्रीडूंगरगढ़) में श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाई गई।
कार्यक्रम की शुरुआत संघ परंपरानुसार संघ के संस्थापक पूज्य श्री तनसिंहजी की तस्वीर पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित कर बालिका स्वयंसेविकाओं की प्रार्थना से की गई
इसके पश्चात संघ के स्वयंसेवक संदीप सिंह पुन्दलसर ने श्री क्षत्रिय युवक संघ के शिविरों के प्रकार, तनसिंहजी की साहित्यिक कृतियां,संघ कार्यालयों का संक्षिप्त परिचय दिया।
वहीं संघ के स्वयंसेवक कल्याण सिंह झंझेऊ ने संघ के संपर्क में रहने से समाज और क्षेत्र में आए में सकारात्मक परिवर्तन की बात साझा करते हुए कहा कि शाखाओं, शिविरों से निरंतर जुड़े रहने के आह्वान किया ताकि व्यावहारिकता का विकास हो

पूर्व सरपंच रतन सिंह केऊ ने श्री क्षत्रिय युवक संघ के आनुषंगिक संगठन श्री प्रताप फाउंडेशन,श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन, प्रताप युवा शक्ति व दुर्गा महिला विकास संस्थान सहित संघ के आनुषंगिक संगठनों के गतिविधियों के बारे में जानकारी दी
पूर्व प्रधान छैलूसिंह शेखावत ने तनसिंह जी के राजनीतिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पूज्य श्री ने राजनीति में रहते हुए भी स्वयं पर हावी नहीं होने दिया,संघ कार्य उनके लिए सदैव प्राथमिकता रहा

कार्यक्रम में स्वयंसेवक कैलाश सिंह ढींगसरी ने पूज्यश्री रचित गीत ‘मैं निर्झर हूं…. का भावपूर्ण ‘ गीत का गायन प्रस्तुत किया।
वरिष्ठ स्वयंसेवक एडवोकेट भरतसिंह शेरूणा ने तनसिंहजी के साथ बिताए पलों को साझा करते हुए कहा कि उनका सान्निध्य बताने की अपेक्षा महसूस करने की चीज है, पूज्य श्री के संचालन में किए शिविरों, कार्यक्रमों उनकी राजनेता रहते हुए भी सादगी, बौद्धिक प्रवचनों के बारे में तथा संघ कार्य के लिए सदैव तत्पर रहने उनके जीवन वृत्त की विस्तृत जानकारी प्रदान की

मुख्य वक्ता के रूप में शेखावाटी संभाग प्रमुख खींवसिंह सुल्ताना ने संस्थापक श्री के जीवन व्यवहार को भगवान राम,कृष्ण ,महावीर स्वामी, बुद्ध के सदृश दायित्वबोध का परिचायक, पूज्य श्री का जन्म परिचय देते हुए तात्कालिक कठिन परिस्थितियों में रहते हुए 4 वर्षीय पुत्र के सिर से पिता का साया उठ जाने के बावजूद भी उन्होंने शैक्षणिक साहित्यिक,राजनीतिक,व्यावसायिक जीवन में उल्लेखनीय योगदान दिया उनके जीवन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि श्री क्षत्रिय युवक संघ पूज्य श्री तनसिंहजी की मानस पीड़ा का ही मूर्त रूप है,देश की आजादी से पूर्व ही समाज के भविष्य का भान करने वाले हमारे प्रणेता ने हम सब लोगों के लिए एक मनोवैज्ञानिक संस्कारमयी कर्मप्रणाली के मार्ग का निर्माण करके हमारे जीवन व्यवहार में ढालने के लिए दिया है इसके लिए हमें सदैव तत्पर रहना चाहिये सदैव सहयोगी की भूमिका में रहने पर ही हम हमारे जीवन व्यवहार को बदल सकते हैं
कार्यक्रम का संचालन श्रीडूंगरगढ प्रांत प्रमुख जेठूसिंह पुंदलसर ने किया

कार्यक्रम में समुद्र सिंह धीरदेसर,भंवरसिंह झंझेऊ, भंवरसिंह जोधासर,हेतराम जाखड़ रीड़ी, जगमालसिंह ईंदपालसर,रणवीर सिंह सेरूणा, जगमालसिंह कीतासर महेंद्र सिंह मिंगसरिया,मांगुसिंह,ओमपाल सिंह जोधासर भंवरसिंह मिंगसरिया,भागीरथ सिंह धर्मास,हरी सिंह गुसाईंसर, अजीतसिंह हीरावतान,माल सिंह धर्मास,लक्ष्मण सिंह इंदपालसर, भुर सिंह हथाणा,करणी सिंह अमरसिंह दुलेसिंह गुसांईसर, रणजीत सिंह धर्मास, देवी सिंह नोसरिया, मदन सिह मिंगसरिया,राजुराम नाई,जनकदास धर्मास व प्रांत क्षेत्र के संघ स्वयंसेवक व तहसील क्षेत्र के गांवों से सभी समाजों के एक हजार से अधिक की संख्या में लोग व मातृशक्ति उपस्थित रही, ।कार्यक्रम के पश्चात अल्पाहार का आयोजन भी किया गया।










