श्रीडूंगरगढ़ टुडे 28 जनवरी 2026
नेशनल हाईवे संख्या 11 पर सेसोमु स्कूल, श्रीडूंगरगढ़ के सामने बुधवार सुबह करीब 4:50 बजे एक स्लीपर बस और ट्रक की टक्कर हो गई। टक्कर के तुरंत बाद दोनों वाहनों में भीषण आग लग गई। कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया और स्लीपर बस पूरी तरह जलकर खाक हो गई। हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल 101 आपातकालीन नंबर पर कई बार कॉल किया, लेकिन कॉल चूरू जिला मुख्यालय पर लगती रही। वहां से यह कहकर बात टाल दी गई कि स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करें। इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और आग लगातार फैलती रही।मौके पर मौजूद लोगों ने आपणो गांव श्रीडूंगरगढ़ सेवा समिति से संपर्क किया। समिति के सेवादारों ने नगर पालिका श्रीडूंगरगढ़ के अधिशासी अधिकारी के मोबाइल नंबर पर कॉल किया, लेकिन फोन नहीं उठाया गया। बताया गया कि समिति के एक सेवादार का नंबर अधिशासी अधिकारी द्वारा पहले से ही ब्लैकलिस्ट किया हुआ है। नगर पालिका श्रीडूंगरगढ़ में दो फायर ब्रिगेड वाहन उपलब्ध होने के बावजूद घटना स्थल पर केवल एक ही फायर वाहन पहुंचा। दूसरे वाहन के बारे में पूछने पर बताया गया कि वह स्टार्ट नहीं हुआ, इसलिए उसे मौके पर नहीं लाया जा सका। सामाजिक कार्यकर्ता शूरवीर मोदी ने बताया कि फायर वाहन की देरी और अपर्याप्त व्यवस्था के कारण स्लीपर बस पूरी तरह जल गई। बस में सवार यात्रियों का कीमती सामान, नकदी और व्यक्तिगत वस्तुएं, जिनकी अनुमानित कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है, आग में स्वाहा हो गईं। यदि समय पर दूसरा फायर वाहन पहुंच जाता, तो बस को बचाया जा सकता था। गनीमत यह रही कि आपणो गांव श्रीडूंगरगढ़ सेवा समिति के सेवादार और आम नागरिक समय पर मौके पर पहुंचे। समिति के फायर फाइटर वाहन की सहायता से बस में मौजूद यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिससे बड़ा जनहानि हादसा टल गया।
सेवा समिति ने नगर पालिका प्रशासन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि-
- आपातकालीन कॉल सिस्टम पूरी तरह विफल रहा
- अधिशासी अधिकारी ने फोन नहीं उठाया
- एक फायर वाहन तकनीकी रूप से अनुपयोगी निकला
- नगर पालिका में कोई निगरानी या आपदा प्रबंधन समिति सक्रिय नहीं है।
समिति की ओर से अध्यक्ष जतनसिंह ने एसडीएम शुभम शर्मा के मार्फ़त जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन देते हुए मांग की है कि जिला आपदा प्रबंधन अथवा आपातकालीन समिति से मामले की जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए निलंबन सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।











