श्रीडूंगरगढ़ टुडे (28 जनवरी 2026)
राजधानी जयपुर के शहीद स्मारक पर आज राजस्थान योग प्रशिक्षक महासंघ के बैनर तले उमड़े सैकड़ों योग प्रशिक्षकों के जनसैलाब ने सरकार को वार्ता की मेज पर आने को मजबूर कर दिया। सुबह जो माहौल “ईंट से ईंट बजाने“ की चेतावनी और आक्रोश से भरा था, वह शाम होते-होते “विजयी मुस्कान” और “सकारात्मक आश्वासन“ में बदल गया।
सचिवालय में चली लंबी वार्ता: सरकार ने मानी ‘ विडंबना‘ धरने के दबाव को देखते हुए प्रशासन ने महासंघ के 4 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए सचिवालय आमंत्रित किया।
सकारात्मक रुख: सचिवालय में सचिव श्री निवासन के साथ हुई लंबी और गहन मंत्रणा के बाद सरकार ने स्वीकार किया कि योग शिक्षकों की मांगें (विशेषकर 30 दिन रोजगार और मानदेय वृद्धि) पूरी तरह जायज हैं।
अधिकारियों का बयान: वार्ता के दौरान अधिकारियों ने माना, “यह वास्तव में विडंबना है कि स्वास्थ्य बांटने वाले योग शिक्षक खुद आर्थिक संघर्ष कर रहे हैं। हम आपकी पीड़ा समझते हैं।”
बड़ा आश्वासन: सरकार ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि आपकी मांगों की फाइल अब तीव्र गति (Fast Track) से आगे बढ़ाई जाएगी और बहुत जल्द इसका स्थायी समाधान निकाला जाएगा।
योग महासंघ टीम ने संभाला मोर्चा, व्यवस्था ने जीता दिल
इतनी बड़ी भीड़ होने के बावजूद,आज का प्रदर्शन अनुशासन की मिसाल बना। इसमें बीकानेर लाला राजस्थानी, बलराम बेनीवाल, राजू लुखा, अन्नाराम सारण, योगाचार्य राकेश कुमार पडिहार ) टीम की भूमिका सबसे अहम रही। योग महासंघ से आए साथियों ने धरना स्थल जल पान और टेंट, माइक की शानदार व्यवस्था संभाली।
राजस्थान योग प्रशिक्षक महासंघ के प्रदेश संरक्षक योगगुरु ओमप्रकाश कालवा, प्रदेश अध्यक्ष योगाचार्य रामावतार यादव प्रदेश महासचिव योगाचार्य रविन्द्र सिंह माल प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष योगाचार्य राकेश कुमार तूनवाल और डॉ. मनोज सैनी सहित पूरी कार्यकारिणी ने जिस तरह भीड़ को नियंत्रित रखा और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी, उसकी प्रशासन ने भी सराहना की।
आक्रोश भी, अनुशासन भी: हिंसा का नाम नहीं
सुबह के सत्र में योग शिक्षकों ने हाथों में पुराने सरकारी वादों के सबूत और अखबारों की कटिंग लहराकर अपना गुस्सा जाहिर किया था। उन्होंने साफ़ कहा था कि “यह सांकेतिक धरना नहीं, बारूद का ढेर है।” लेकिन महासंघ की परिपक्वता देखिए कि इतना गुस्सा होने के बाद भी पूरा आंदोलन पूर्णतः अहिंसक (Non-violent) रहा। पुलिस प्रशासन ने भी माना कि योगियों का यह अनुशासन काबिले तारीफ था।
इन मांगों पर बनी सहमति की उम्मीद:
प्रतिनिधिमंडल ने अपनी प्रमुख मांगें जो मजबूती से रखीं और जिन पर सकारात्मक संकेत मिले हैं:
कार्य दिवस वृद्धि: 10 दिन के बजाय पूरे माह (30 दिन) का रोजगार।
स्थायीकरण: CSR रूल 2022 के तहत नियमितीकरण।
मानदेय: सम्मानजनक वेतनमान।
निष्कर्ष: आज का धरना प्रदर्शन ऐतिहासिक रूप से सफल रहा। सरकार के सकारात्मक आश्वासन के बाद महासंघ ने धरना समाप्त करने की घोषणा की, लेकिन साथ ही यह इशारा भी कर दिया कि अगर जल्द आदेश जारी नहीं हुए, तो योग शिक्षक दोबारा जयपुर कूच करने में देर नहीं लगाएंगे।














