श्रीडूंगरगढ़ टुडे 1 फरवरी 2026
परीक्षा का नाम सुनते ही कुछ बच्चे तनाव में आ जाते हैं और अपनी मुश्किलें किसी भी सख्श को बता नहीं पाते हैं हमारा नैतिक कर्तव्य है कि हम बच्चों को तनाव से व परीक्षा के भय से मुक्त करें। इस कार्य को करने के लिए हमें भरसक प्रयास करने होगे। परीक्षा के दिनों में बच्चों को तनावमुक्त रखने के लिए एक व्यवस्थित टाइम-टेबल, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद (7-8 घंटे) और पढाई के बीच छोटे ब्रेक अनिवार्य है। योगा, , प्राणायाम प्राणायाम या 10 मिनट टहलने जैसी शारीरिक शांति और एकाग्रता बढ़ाती हैं। सकारात्मक माहौल, परीक्षा पर खुलकर चर्चा और पौष्टिक नाश्ता बच्चों को तनावमुक्त करने में मदद करते हैं। तनाव कम करने के लिए महत्वपूर्ण टिप्स –
टाइम टेबल और रिवीजन (पुनरावृत्ति).
पढ़ाई का समय निर्धारित करें और परीक्षा से कम से कम एक महीना पहले पाठ्यक्रम पूरा करके अधिक से अधिक रिवीजन करें।
बीच में ब्रेक लें
1-2 घण्टे लगातार पढ़ने के बाद 10-15 मिनट का ब्रेक लें।
पोषण का ध्यान
परीक्षा के दौरान केला, भीगे बादाम, अखरोट और मौसमी फल खाएं व संतुलित आहार लें।
सकारात्मक वातावरण-
बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें, लेकिन परिणाम का दबाव न बनाएं। उनकी भावनाओं को समझें और खुलकर बात करें।
शारीरिक गतिविधियाँ
रोजाना सुबह-शाम थोड़ी देर टहलें या योग करें, जिससे शरीर और दिमाग शांत रहे।
परीक्षा के दिन
परीक्षा से पहले हल्का और स्वस्थ खाना खाएं, बहुत अधिक गरिष्ठ भोजन न करें।
परीक्षा हॉल में
प्रश्न पत्र मिलते ही निर्देश ध्यान से पढ़ें, आंतरिक खण्ड के प्रश्नों को एक साथ हल करें और आखिरी में रिवीजन के लिए समय बचाएं।
तनाव से बचाव
पढ़ाई के बीच में सांस लेने वाले व्यायाम करें , खुद को शांत रखें और दूसरों से तुलना न करें।
जरूरी सामान
परीक्षा के लिए आवश्यक पेन, पेंसिल, पानी की बोतल और प्रवेश-पत्र पहले से तैयार रखें। “नियमित और सुनियोजित तैयारी ही सफलता की कुंजी है।”
अभिभावकों का योगदान
अपने बच्चों को तनावमुक्त करने के लिए भरसक प्रयास करें। परीक्षा के दिनों में बच्चों को मानसिक रूप से स्थिर रखने के लिए अभिभावकों का समर्थन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। उन्हें घर का माहौल शांत, तनावमुक्त रखें, स्वस्थ खान-पान सुनिश्चित करें और तुलना करने से बचें। दोस्तों जैसा व्यवहार अपनाकर और उनकी बातों को सुनकर उनके आत्मविश्वास को बढ़ाए।
अध्यापकों का योगदान
परीक्षा के दिनों में अध्यापकों द्वारा बच्चों का साथ देना मानसिक तनाव कम करने और बेहतर प्रदर्शन के लिए बेहद जरूरी है। शिक्षक सकारात्मक माहौल बनाकर, पाठ्यक्रम के प्रति स्पष्टता, महत्वपूर्ण विषयों के संशोधन और संकोच मुक्त संवाद के माध्यम से छात्रों का मनोबल बढ़ा सकते हैं। यह भावनात्मक और अकादमिक समर्थन छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाता है। बच्चों को अच्छी सीख दें। बच्चों को समझाएं कि परीक्षा एक आंकलन है डरे नहीं। बच्चों को सुनियोजित टाइम-टेबल बनाकर दें। बच्चों की विषय सम्बन्धित शंकाओं को दूर करें। बच्चों के प्रयासों की सराहना करके उनका मनोबल बढ़ाने में मदद करें। अध्यापक की भूमिका न केवल अच्छे परिणामों के लिए बल्कि छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों का योगदान अच्छे अंक की प्राप्ति के लिए बच्चों को दृढ़ निश्चयी होना होगा। एक अच्छा टाइम टेबल बनाना होगा, पाठ्यक्रम को समझना होगा। नियमित रूप से पढ़ाई करनी होगी।
विधार्थियों का योगदान
अच्छे अंक की प्राप्ति के लिए बच्चों को दृढ़ निश्चयी होना होगा। एक अच्छा टाइम टेबल बनाना होगा, पाठ्यक्रम को समझना होगा। नियमित रूप से पढ़ाई करनी होगी, शॉर्ट नोट्स बनाने होंगे, पिछले प्रश्न पत्रों का अभ्यास करना होगा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा ताकि एकाग्रता बनी रहे और आप समय पर अपना काम पूरा कर सकें, सोशल मीडिया से दूरी बनाना और हर रोज रिवीजन करना, जितना पड़ाया उतना याद करना। इन बातों को अपनाने से विद्यार्थी तनाव व डर से मुक्त रहेगा।
हर बच्चा अपना है, हमे ही संभालना होगा। उसे अच्छा लगे या न लगे, हमें ही उसे टोकना होगा। टोकने से, रोकने से किसी की जिन्दगी बनती है, तो हम सबको ये कदम उठाना होगा। हर’ समस्या का सामना कर सकें, एक मजबूत इंसान बनाना होगा।










