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आखिर खेजड़ी बचाओ प्रकृति बचाओ आमरण अनश्त हुआ समाप्त, सरकार व संतों के बीच बनी सहमति

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श्रीडूंगरगढ़ टुडे 5 फरवरी 2026

बीकानेर एवं जोधपुर संभाग में राज्य सरकार ने नया कानून बनने तक खेजड़ी काटने कर प्रतिबंध लगा दिया है इसी के। साथ प्रशासन के गले की घंटी बन चुका खेजड़ी बचाओ-प्रकृति बचाओ  आमरण अनशन आंदोलन अंतत: अपने मुकाम तक पहुंच गया। राज्य सरकार के दूत बनकर आए राज्य मंत्री एवं विश्नोई समाज के वरिष्ठ नेता के के बिश्नोई तथा भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी लाल बिश्नोई, विधायक पब्बाराम बिश्नोई, राज्य जीवजंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंतसिंह आदि की मध्यस्थता से आमरण अनशन विधिवत रूप से समाप्त कर दिया गया जबकि धरना जारी रखने का निर्णय लिया गया।गत कई दिनों से चल रहे इस आंदोलन ने प्रशासन और सरकार दोनों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी थी। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग खेजड़ी वृक्षों की कटाई पर रोक, पर्यावरण संरक्षण को लेकर ठोस नीति और भविष्य में ऐसे प्रोजेक्ट्स में जनभावनाओं का सम्मान करने की थी। आमरण अनशन पर बैठे संतों, महिलाओं और ग्रामीणों की बिगड़ती सेहत ने भी स्थिति को संवेदनशील बना दिया था।मंगलवार को सरकार की ओर  से आए प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलनकारियों से विस्तृत संवाद किया। के के बिश्नोई बिहारी लाल बिश्नोई,पब्बाराम बिश्नोई,जसवंत सिंह आदि ने दोनों पक्षों के बीच सेतु बनते हुएसमाधान का मार्ग प्रशस्त किया। वार्ता के दौरान सरकार ने खेजड़ी वृक्षों के संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय समाज की सहभागिता सुनिश्चित करने का लिखित में आश्वासन दिया। साथ ही, भविष्य में किसी भी परियोजना से पहले सामाजिक व पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन करने पर सहमति बनी। सरकारी आश्वासन के बाद संतों के नेतृत्व में आमरण अनशन समाप्त कराया गया और धरना स्थल से आंदोलन शांतिपूर्वक खत्म हुआ। आंदोलनकारियों ने इसे जनआंदोलन की नैतिक जीत बताते हुए कहा कि यह संघर्ष केवल खेजड़ी के लिए नहीं, बल्कि प्रकृति और भावी पीढिय़ों के अधिकारों के लिए था।प्रशासन ने भी राहत की सांस लेते हुए विश्वास जताया कि संवाद और सहमति से निकला यह समाधान भविष्य में टकराव की बजाय सहयोग का उदाहरण बनेगा।

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