बीकानेर में पंचायती राज विभाग के जूनियर असिस्टेंट शुभकरण परिहार के 5 ठिकानों पर शुक्रवार को ACB रेड के बाद अब चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जूनियर ग्राम पंचायत में ऑफिस असिस्टेंट की एक छोटी सी सरकारी नौकरी करने वाला शुभकरण परिहार कैसे करोड़पति बन गया?
बेहद साधारण परिवार से आने वाले शुभकरण की 2010 में नौकरी लगी थी। इससे पहले उसके पास गांव में महज एक प्लॉट था, लेकिन 15 साल की नौकरी में उसने 17 हैक्टेयर से अधिक कृषि और रिहायशी जमीनें खरीदीं। 11 जमीनें पत्नी के नाम गिफ्ट कर दीं। सरकारी नौकरी से उसे अबतक महज 17 लाख सैलरी मिली। लेकिन आय से 940 गुणा अधिक प्रॉपर्टी का मालिक बन गया।
पिछले 9 साल से शुभकरण लगातार प्रॉपर्टी और गोल्ड में इन्वेस्ट कर रहा था। उसके घर से करीब 3 करोड़ का गोल्ड-सिल्वर मिला है। गत्ते के कार्टन में पैक करके रखा हुआ 76 लाख रुपए का कैश भी मिला था। ACB ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है।
भ्रष्ट कर्मचारी की इमेज, 6 महीने से था रडार पर
बीकानेर के पूनरासर में रहने वाला शुभकरण फलोदी की बाप पंचायत समिति के कानासर ग्राम पंचायत में कनिष्ठ सहायक पद पर तैनात है। ACB को सूचना मिली कि शुभकरण वेतन के मुकाबले उससे कहीं ऊंचे दर्जे का जीवन जी रहा है।
उसकी इमेज भी भ्रष्ट कर्मचारी की बनी हुई है। उसकी गतिविधियां भी संदिग्ध हैं। इसके बाद ACB की टीमें उस पर पिछले 6 महीने से नजर रखे हुए थीं। शिकायतों के पुख्ता होने के बाद शुक्रवार को ACB ने रेड डाली। शुभकरण की 2010 के बाद पूरी संपत्ति को जांचा गया।
ACB सूत्रों के अनुसार जांच में सामने आया कि बेहद साधारण ग्रामीण परिवार से ताल्लुक रखने वाले शुभकरण की सरकारी नौकरी लगते ही जिंदगी 360 डिग्री बदल गई, जो ईमानदारी से की गई कमाई से संभव ही नहीं है। सरकारी नौकरी में आने के बाद शुभकरण के रहन-सहन में जमीन आसमान का अंतर आया। नौकरी से पहले की स्थिति खास नहीं थी। पिता गांव में ही खेतीबाड़ी करते और 4 बेटों को पाला। इनमें से एक शुभकरण परिहार की सरकारी नौकरी लग गई।
शुभकरण के तीनों भाई मजदूरी और कपड़ा बेचने का काम कर रहे हैं। तीनों अलग रहते हैं। एसीबी के अनुसार शुभकरण के पास सरकारी नौकरी से वेतन के अलावा आय का कोई साधन या कोई भी बिजनेस नहीं है। शुभकरण के तीन बच्चे हैं, जो 10वीं, 12वीं और बीए में हैं।
छोटा सा पद, लेकिन बड़े कारनामे
ACB के अनुसार शुभकरण मार्च 2010 में रोजगार सहायक के पद पर ग्राम पंचायत पुनरासर, पंचायत समिति श्री गरगढ़, जिला बीकानेर में नियुक्त हुआ था। तब उसका वेतन बमुश्किल 15 हजार रहा होगा। ग्राम पंचायत सचिव की अनुपस्थिति में रोजगार सहायक को सचिव के प्रशासनिक कार्य भी सौंपे जा सकते हैं।
वह 2022 तक रोजगार सहायक के पद पर ही कार्यरत रहा। इसके बाद शुभकरण की पदोन्नति कनिष्ठ सहायक (ऑफिस असिस्टेंट) के पद पर हुई। प्रमोशन के बाद से वह ग्राम पंचायत कानासर, पंचायत समिति बाप जिला फलौदी में कार्यरत है। उसकी मौजूदा सैलरी करीब 37 हजार रुपए है।
ACB के अनुसार शुभकरण ने 15-16 साल की नौकरी में वेतन के रूप में कुल मात्र 17 लाख रुपए ही अर्जित किए। इतनी कम सैलरी के बावजूद घर से करीब 2 करोड़ 25 लाख का सोना मिला है। करीब 7.5 लाख रुपए की चांदी और 76 लाख रुपए का कैश भी मिला है
एसीबी सूत्रों के अनुसार शुभकरण ने सबसे अधिक इन्वेस्टमेंट फार्म हाउस और प्लॉट खरीदने में किया। इसके बाद सोना-चांदी और नकदी भी इकट्ठी की। स्थानीय सूत्रों के अनुसार परिहार प्रॉपर्टी डीलिंग के व्यवसाय से भी जुड़ा हुआ है।
रोजगार सहायक और अब ऑफिस असिस्टेंट बने शुभकरण के जिम्मे रहे ये काम रहे…
महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA) के लिए जॉब कार्ड जारी करना, रोजगार आवेदन लेना, मस्ट्रोल भरना, काम की जिओ-टैगिंग (Geo-tagging) और ग्रामीण विकास योजनाओं का क्रियान्वयन ।
पंचायत क्षेत्र में चल रहे रोजगार-मूलक कार्यों, जैसे -सड़क निर्माण, जल संरक्षण और अन्य विकास कार्यों का रिकॉर्ड रखना।
स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं को ग्राम-स्तर तक पहुंचाना। ग्राम सभाओं के निर्णयों को लागू करने में मदद करना।
एक ही साल में कर डाले जमीनों के 5 बड़े-बड़े सौदे
शुभकरण के जमीन से ‘लगाव’ ने ACB को भी चौंका दिया। रेड में 17 हैक्टेयर से अधिक जमीनों के कागजात मिले। साल 2024 में 5 जमीनों के सौदे किए। उसने कई हैक्टेयर के 4 फार्म हाउस और एक 260 गज का रिहायशी प्लॉट खरीदा। ये पांचों प्रॉपर्टी पत्नी सरिता के नाम खरीदी गईं।
वहीं, 2023 में भी पत्नी के नाम एक फार्म हाउस और एक रिहायशी प्लॉट भी खरीदा। इससे पहले 2022 में भी एक फार्म सरिता को ‘गिफ्ट’ किया। पत्नी सरिता के नाम 2021, 2019 और 2016 में एक-एक प्लॉट खरीदा और निर्माण भी करवाए। इस बीच खुद के नाम 2018 में करीब सवा हैक्टेयर का फार्म हाउस भी खरीदा।
ACB के अनुसार साल 2010 में नौकरी लगने से पहले शुभकरण के पास मात्र एक प्लॉट था। यह प्लॉट 2007 में कालूरोड, श्रीडूंगरगढ़ में 60 बाई 40 फीट का है। इसके अलावा सारी संपत्ति नौकरी के बाद ही बनाई गई।
पत्नी सरिता के नाम खरीदी संपत्ति
2024 – छींपों का मोहल्ला, बीकानेर में 250 गज प्लॉट और निर्माण – 13.33 लाख
2023 – 25 बाई 45 का प्लॉट और निर्माण, व्यास कॉलोनी, बीकानेर – 40 लाख
2021 – मातेश्वरी एनक्लेव में प्लाट और निर्माण, उदासर – 26 लाख
2019 – मातेश्वरी एनक्लेव में प्लाट और निर्माण, उदासर – 2 लाख
2016 – मातेश्वरी एनक्लेव में प्लाट और निर्माण, उदासर में 23 बाई 37 का प्लाट 4.21 लाख

पत्नी के नाम खरीदे फार्म
2024 – पुनरासर, श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर में फार्म – 4.87 लाख
2024 – पुनरासर, श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर में फार्म – 3.85 लाख
2024 – पुनरासर, श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर में फार्म – 3.81 लाख
2024 – पुनरासर, श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर में फार्म – 4.20 लाख
2023 – रोही पुनरासर 9.04 हेक्टेयर कृषि भूमि में 1/6वां हिस्सा – 6 लाख
2022 – रोही पुनरासर 6.25 हेक्टेयर कृषि भूमि -10.79 लाख
खुद के नाम पर संपत्ति
2021 – गांव पुनरासर बोथरा धर्मशाला पुश्तैनी मकान में नया निर्माण – 25 लाख
2018 – रोही पुनरासर 1.27 हेक्टेयर कृषि भूमि – 5 लाख

ACB जांच में मिली संपत्ति का लेखा-जोखा
डीआईजी भुवन भूषण यादव, एएसपी विनोद कुमार और आशीष कुमार रघुवंशी के नेतृत्व में 5 टीमें बनाई गई। एक दिन पहले बीकानेर शहर के जयनारायण व्यास कॉलोनी, वैशाली धााम के सामने मातेश्वरी एन्क्वलेव, जयपुर रोड और बागीनाड़ा स्थित छीपों का मोहल्ला रानी बाजार और पूनरासर गांव में शुभकरण के ठिकानों पर रेड डाली। शुभकरण परिहार ने घर में ही नोटों की गड्डियां छुपा कर रखी थी, जिन्हें गिनने के लिए काउंटिंग मशीन मंगानी पड़ी। रेड के दौरान शुभकरण के पास 1 स्कॉर्पियो, 1 स्विफ्ट कार, बुलेट और 1 हीरो बाइक के साथ ही करोड़ों के लेन-देन के कागजात भी मिले हैं।

