श्रीडूंगरगढ़ टुडे 27 फरवरी 2026
आज मोबाइल हर व्यक्ति पर हावी हो गया, इस मोबाइल के चलते व्यक्ति का सुकून छिन गया है। मोबाइल के नकारात्मक व सकारात्मक दोनों पहलू है, सकारात्मक रूप में ले तो जिन्दगी सुधर जाती है, नकारात्मक रूप से जिन्दगी बद से बदतर हो जाती है। सोशल मीडिया ने लोगों की सोच को जकड़ लिया है, उसने हर व्यक्ति की कमी को पकड़ लिया है। आज मोबाइल की वजह से घर टूट रहे है, क्योंकि खाने भी लोग मोबाइल की बातें परोस रहे हैं। पास में कोई व्यक्ति बैठा है उससे बोलने का वक्त नहीं है, अब रिश्ते जल्दी टूट जाते हैं क्योंकि वे सख्त नहीं है। बच्चे को मोबाइल के लिए मना कर दो, लड्ने-मरने पर तुल जाते हैं, उनमें ये भाव शायद सोशल मीडिया से ही आते हैं। पति-पत्नी को भी एक दूसरे से बात करने का वक्त नहीं-क्योंकि उन दोनों का मोबाइल चलाना मिटता नहीं। मोबाइल के कारण सभी रिश्ते टूटने की कगार पर है, क्योंकि हमारे जीवन में सर्वोच्च स्थान पर मोबाइल है। मैं वयह नही कहती कि मोबाइल बन्द करो, मैं तो यह कहना चाहती हूँ इसका प्रयोग कम करो। वर्तमान समय में लोग घर, परिवार, बच्चों पर ध्यान कम दे पाते हैं, इस कारण घर परिवार टूटते और बच्चे बिगड़ते-नजर आते है। डिजिटल जमाना है मोबाइल का प्रयोग तो करना पड़ेगा, हमें इस सत्य को स्वीकार भी करना पड़ेगा। मोबाइल के उपयोग में यह भी ध्यान तो परिवार भी जरूरी है, और मुश्किल समय में परिवार ही साथ देता है, इसलिए मोबाइल का सीमित प्रयोग करें ।










