श्रीडूंगरगढ़ टुडे 27 फरवरी 2026
राजस्थान योग प्रशिक्षक महासंघ प्रदेश संरक्षक योगगुरू ओम कालवा ने बताया आज योग को विश्व स्तर पर पहचान प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा मिली है। इसके बावजूद धरातल पर योग प्रशिक्षकों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। सरकारों और संस्थाओं द्वारा योग को बढ़ावा देने के अनेक दावे किए जाते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि प्रशिक्षित और प्रमाणित योग प्रशिक्षक रोजगार के लिए भटक रहे हैं।
योग प्रशिक्षकों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक प्रशिक्षण प्राप्त किया, प्रमाण पत्र हासिल किए और समाज को स्वस्थ बनाने का संकल्प लिया, परंतु स्थायी रोजगार, मानदेय और सम्मानजनक अवसरों का अभाव है। बेरोजगार योग प्रशिक्षक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, जिससे उनके सामने परिवार का पालन-पोषण करना भी कठिन हो गया है। कालवा ने कहा डबल इंजन की सरकार होते हुए भी बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं योग प्रशिक्षक पूर्णरूप से भारतीय जनता पार्टी से नाराज होते हुए दिखाई दे रहे हैं।
योग को स्कूलों, कॉलेजों, पंचायत स्तर और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर अनिवार्य रूप से लागू करने की घोषणाएँ तो हुईं, परंतु नियुक्तियों की प्रक्रिया स्पष्ट और नियमित नहीं है। अस्थाई पार्ट टाइम में भी अल्प मानदेय पर कार्य करना मजबूरी बन गया है।
योग प्रशिक्षकों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:–
- सरकारी स्तर पर नियमित और स्थायी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
- योग प्रशिक्षकों के लिए सम्मानजनक मानदेय तय किया जाए।
- प्रत्येक विद्यालय और स्वास्थ्य केंद्र में योग शिक्षक की नियुक्ति अनिवार्य की जाए।
- योग को निवारक स्वास्थ्य नीति का स्थायी हिस्सा बनाया जाए।
योग केवल कार्यक्रमों और आयोजनों तक सीमित न रहे, बल्कि उसे व्यवहारिक रूप से लागू कर प्रशिक्षकों को सम्मानजनक रोजगार प्रदान किया जाए।
अंत में, सभी संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों से अनुरोध है कि योग प्रशिक्षकों की समस्याओं का शीघ्र समाधान कर उन्हें न्याय दिलाया जाए, ताकि योग के माध्यम से स्वस्थ भारत का सपना साकार हो सके।
राजस्थान योग प्रशिक्षक महासंघ के नेतृत्व कर्ता योगाचार्य रामावतार यादव, राकेश कुमार तूनवाल, रविंद्र सिंह गुर्जर व समस्त सदस्यों ने बड़ी उग्रता के साथ कहा है सब्र का बांध टूट चुका है उग्र आंदोलन झेलने के लिए सरकार तैयार रहे।




