श्रीडूंगरगढ़ टुडे 7 मार्च 2026
आज समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ लगभग हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार, अनैतिकता और स्वार्थ तेजी से बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। शिक्षा, राजनीति, प्रशासन, व्यापार और सामाजिक व्यवस्था—हर जगह ईमानदारी और नैतिक मूल्यों का ह्रास चिंता का विषय बनता जा रहा है। यदि समय रहते इस स्थिति पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य गंभीर संकट में पड़ सकता है।
राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त योगगुरू ओम कालवा ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज का युवा जिस वातावरण में बड़ा हो रहा है, वहाँ मेहनत और सच्चाई से ज्यादा शॉर्टकट और अनुचित साधनों को महत्व दिया जाने लगा है। यह स्थिति समाज की नींव को कमजोर करने वाली है। जब बच्चे और युवा अपने आसपास गलत कार्यों को सामान्य रूप में होते देखते हैं, तो उनके मन में भी नैतिकता के प्रति विश्वास कम होने लगता है।
योगगुरू ओम कालवा ने कहा कि केवल कानून बनाकर या भाषण देकर भ्रष्टाचार समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज के हर व्यक्ति को स्वयं से शुरुआत करनी होगी। परिवारों में बच्चों को अच्छे संस्कार देने होंगे और शिक्षा व्यवस्था में नैतिक मूल्यों को फिर से मजबूत बनाना होगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और योग की परंपरा हमें सत्य, अनुशासन, ईमानदारी और आत्मसंयम का मार्ग दिखाती है। यदि युवाओं को योग, संस्कार और सकारात्मक सोच से जोड़ा जाए तो वे समाज के लिए आदर्श नागरिक बन सकते हैं।
योगगुरू ओम कालवा ने समाज के सभी वर्गों से अपील करते हुए कहा कि यदि हम सच में आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित देखना चाहते हैं तो भ्रष्टाचार और अनैतिकता के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठानी होगी और अपने जीवन में ईमानदारी को अपनाना होगा। तभी एक सशक्त, संस्कारित और सुरक्षित समाज का निर्माण संभव हो सकेगा।


