श्रीडूंगरगढ़ टुडे 3 नवम्बर 2025
हिंदू धर्म में तुलसी विवाह का विशेष महत्व है। यह पर्व हर वर्ष देवउठनी एकादशी तिथि को मनाया जाता है, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और सृष्टि में पुनः शुभता और सौभाग्य का संचार होता है। तुलसी विवाह को माता तुलसी (देवी लक्ष्मी का रूप) और भगवान विष्णु (शालिग्राम स्वरूप) के पवित्र मिलन का प्रतीक माना गया है। इस दिन घर पर तुलसी विवाह करना अत्यंत शुभ और पुण्यकारी माना गया है, क्योंकि यह अनुष्ठान कन्यादान के समान फल प्रदान करता है। रविवार को कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी पर मंदिरों व घरों में तुलसी विवाह पूजन व्रत उपवास के साथ तुलसी पूजन विवाह के आयोजन हुए। कई घरों में धूमधाम से तुलसी विवाह विधि संपन्न करवाई गई। कार्तिक माह महिला वर्ग के लिए विशेष रूप से व्रत पूजन का महीना है।बुधवार को तुलसी विवाह के आयोजन संपन्न हुए। हर घर में तुलसी क्यारी को फुलों व रंग, दीपक से सजाया गया। तुलसीजी को चुनरी ओढ़ाकर शालिग्राम जी के साथ तुलसीजी के फेरे करवाने की परंपरा का निर्वहन किया गया। कथा कहानी सुनकर तुलसीजी से घर परिवार में सुख समृद्धि की प्रार्थनाएं की गई। तुलसी माँ की आरती के बाद प्रसाद वितरण के साथ पूजन पूर्ण किए गए।















