श्रीडूंगरगढ़ टुडे 5 नवम्बर2025
देव दिवाली का त्योहार हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन देवता धरती पर आते हैं और दिवाली मनाते हैं। श्रीडूंगरगढ़ में कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान और दीपदान का विशेष महत्व होता है। मंदिरों में भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया व भजन कीर्तन के कार्यक्रम संपन्न हुए। मंदिरों में शाम से ही रौनक छाई रही। हर घर से श्रद्धालु मंदिर में दीपदान करने पहुंचे व मंदिरों और गौशालाओं में दीप जलाएं गए। आड़सर बास में राम मंदिर के पुजारी देवकिशन छंगाणी ने बताया कि भगवान शिव ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन त्रिपुरासुर का वध किया था और इसलिए देवताओं ने इस दिन काशी में दीप दान कर दिवाली मनाई थी। इसी लिए कार्तिक पूर्णिमा को देव दिवाली आज भी मनाई जाती है, माना जाता है कि आज भी देवता कार्तिक पूर्णिमा पर देव दिवाली मनाते हैं। वहीं त्रिपुरासुर का वध करने की वजह से भगवान शिव का एक नाम त्रिपुरारी भी है और इसलिए कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता। देव दिवाली पर गंगा, यमुना के घाटों पर आज भी लोग दीप दान करते है। नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने व देवताओं की कृपा प्राप्ति के लिए श्रद्धालु आज के दिन मंदिर व गौशालाओं में दीपदान करते है। गांव दुलचासर में सत्यनारायण मंदिर में पुजारी गोवर्धन ओझा, विश्वकर्मा मंदिर में पुजारी शिवनारायण कांगला, ठाकुरजी मंदिर में पुजारी लालदास स्वामी के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने दीपदान संपन्न किया। गांव की श्रीगोपाल गौशाला में सचिव रेवंत सिंह ने बताया कि गौशाला प्रांगण में उत्साह के साथ देव दीपावली धूमधाम से मनाई गई। आप भी देखें क्षेत्र के अनेक मंदिरों से विशेष फोटो।













