श्रीडूंगरगढ़ टुडे 21 नवम्बर 2025
“माँ जैसा कोई नहीं”
“माँ साक्षात् देवी स्वरूपा है, माँ जैसा कोई नहीं।”
एक गाँव में एक डाकिया रहता था। पूरे गाँव की डाक वहीं बाँटता था। सब लोग उसकी आवभगत करते थे। वह गाँव के सभी लोगों को जानता था। एक बार उसके पास एक पत्र आया। उस पत्र जो पता लिखा था। उस पते पर वह पहले कभी नहीं गया था। डाकिया उस पते पर पहुँचा दरवाजा खटखटाया अन्दर से आवाज आई आ रही हूँ वह आवाज एक लड़की की थी, उसे आने में थोड़ी देर लग रही थी डाकिये को अन्दर ही अन्दर गुस्सा आ रहा था। जब दरवाजा खुला तो उस लड़की ने कहा माफ करना चाचा आने में थोड़ी देर हो गई। जब डाकिये ने उसे देखा तो उसे पूछतावा हआ क्योंकि उस लड़की के पैर नहीं थे वह अपाहिज थी। डाकियों खुद पर ही गुस्सा प्रकट करते हुए वहाँ से चला गया। थोड़े दिन बाद उस लडक़ी के लिए फिर से एक पत्र आया इस बार डाकिया खुशी खुशी गया और कहा बेटी तुम दखाजा मत खालना में पत्र दरवाजे के नीचे से डाल देता हूँ। बच्ची ने कहा रुको चाचा आप जाना मत मुझे आपको कुछ देना है। लड़की ने उस डाकिये को एक गिफ्ट दिया और कहा “घर जाकर खोलना, डाकिया घर गया और देखा कि उस गिफ्ट में चप्पल है। | डाकिये की आँखों में आँसू आ गये फिर डाकिया एक चप्पल “की दुकान में पत्र देने गया वहाँ एक लड़का आया। लड़के ने दुकानदार से कहा मेरे माँ के नाप की एक जोड़ी चप्पल देना दूकानदार ने कहा नाप बताओ। उस लड़के ने कहा नाप तो मैं नहीं बता सकता क्योंकि मेरी माँ ने आज तक चप्पल नहीं पहनी। मैं बहुत छोटा था तब मेरे पिता का निधन हो गया हमारा जीवन अभावग्रस्त था मेरी माँ के पास चप्पल खरीदने के पैसे नहीं थे लेकिन मेरी माँ ने मेहनत करके मुझे पढ़ाया और कहा मेरे बेटे मेरे पैरों में चप्पल जरूरी नहीं है लेकिन तुम्हारे पैरों में जूते जरूरी है। मेरी माँ मेरे लिए दिन रात मेहनत करती थी। मेरी माँ की “मेहनत और ईश्वर की कृपा से आज मेरी नौकरी लग गई। मैंने खुद से वादा “किया था कि जिस दिन मेरी नौकरी लग जाएगी मैं अपनी माँ के लिए चप्पल “खरीदूंगा इसलिए मैं आपकी दूकान आया हूँ लेकिन मैने कागज पर पैरों के स्केच बनाए है उसके आधार पर आप मुझे मेरी माँ के लिए चप्पल दे दीजिए। दूकानदार ने चप्पल दे दी। और उन तीनों की आँखों में आँसू आ गए। फिर दूकानदार ने उसके साथ एक जोड़ी चप्पल उस लड़के को और दे दी और कहा माँ को कहना अब हमेशा मुझसे पहनने के लिए चप्पल ले जाया करें और वो कागज मुझे दे दो जो तुम्हारे पास है। लड़के ने कागज दिया और चला गया। उस दुकान-दार ने वो कागज पूजा घर में रखा और पूजा करने लगा। नौकर ने कहा- ये आप क्या कर रहे हैं। दूकानदार ने कहा कि वह माँ साक्षात लक्ष्मी है जिसने इस लड़के को जन्म दिया और इतने अच्छे संस्कार दिए सही मायने में आज ही मेरे पूजा घर में साक्षात माँ लक्ष्मी आई हैं और मैं पूजा कर रहा हूँ। माँ जब लक्ष्मी स्वरूपा होती है तो उस माँ के संस्कार बच्चे में नजर आने लगते है, तब ही तो कहा है माँ जैसा कोई नहीं।





