श्रीडूंगरगढ़ टुडे 27 नवंबर 2025
राजस्थान हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्यभर में हाईवे पर स्थित शराब के ठेकों को लेकर बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है. हाईवे पर बढ़ती दुर्घटनाओं, शराब की आसान उपलब्धता और सड़क सुरक्षा पर इसके गंभीर प्रभावों को देखते हुए कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि स्टेट और नेशनल हाईवे पर 500 मीटर के दायरे में लगाए गए सभी शराब के ठेके तुरंत हटाए जाएं. हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद पूरे प्रदेश में शराब ठेकों के संचालन पर बड़ा असर पड़ने जा रहा है, क्योंकि लगभग 1102 ठेकों को यह निर्णय सीधे प्रभावित करेगा. अदालत ने यह आदेश देते हुए राज्य सरकार और आबकारी विभाग को दो महीने की समय–सीमा भी दी है, जिसके भीतर सभी ठेकों को हटाकर सुरक्षित स्थानों पर रिलोकेट करना अनिवार्य होगा।
इस महत्वपूर्ण फैसले से पहले कोर्ट में यह मुद्दा सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक हित से जुड़े गंभीर पहलुओं के साथ उठाया गया था. कई बार यह देखा गया कि हाईवे किनारे शराब की दुकानों की वजह से लोग आसानी से नशे की हालत में वाहन चलाने लगते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि सड़क सुरक्षा से बड़ा कोई हित नहीं हो सकता. ऐसे में शराब की उपलब्धता को नियंत्रित करने के लिए हाईवे ज़ोन को पूरी तरह सुरक्षित बनाना जरूरी है. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार और प्रशासन समय पर कदम नहीं उठाते, तो आम जनता की जान जोखिम में पड़ती रहेगी, जिसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
दो महीने में सभी ठेके हटाने के निर्देश, प्रशासन पर बढ़ा दबाव
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया है कि दो माह के भीतर राज्यभर में स्टेट और नेशनल हाईवे पर मौजूद सभी शराब के ठेकों को हटाकर वैकल्पिक जगहों पर शिफ्ट किया जाए. यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा कि रिलोकेशन हाईवे की सीमा से कम से कम 500 मीटर दूर हो और यातायात सुरक्षा नियमों का पालन हो. आबकारी विभाग को प्रत्येक ठेके की लोकेशन रिपोर्ट तैयार करने और अमल की प्रगति कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं. आदेश के बाद जिलों के प्रशासन और पुलिस पर भी सख्ती से इन निर्देशों को लागू करवाने की जिम्मेदारी बढ़ गई है।
1102 ठेके होंगे प्रभावित, शराब व्यवसाय पर बड़ा असर
आदेश के बाद प्रदेश में कुल 1102 ठेकों को हटाया जाना अनिवार्य होगा. यह संख्या राजस्थान की शराब बिक्री व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डालने वाली है. विशेषज्ञों के अनुसार, रिलोकेशन के दौरान कई ठेकों को नए लाइसेंस, नई लैंड अलॉटमेंट और नए सेफ्टी पैरामीटर्स पूरे करने होंगे, जिससे उनकी संचालन लागत बढ़ सकती है. वहीं आम जनता और सड़क सुरक्षा से जुड़े संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है, इसे जन–हित के लिए बड़ा कदम बताया है. हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार और संबंधित विभागों को तेज़ी से कार्रवाई करनी होगी, क्योंकि दो महीने की तय समय–सीमा बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।




