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श्रीडूंगरगढ़ में 2 महीने चले सरकारी शिविर: 16 विभागों के 43 तरह के काम निपटाए, राजस्व रिकॉर्ड सुधार के 767 मामले सुलझे

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श्रीडूंगरगढ़ टुडे 3 दिसंबर 2025

गांवों में सरकारी सेवाओं को लोगों तक सीधे पहुंचाने और उनकी समस्याओं का मौके पर समाधान करने के लिए उपखण्ड श्रीडूंगरगढ़ में 17 सितंबर से 21 नवंबर तक लगातार शिविर लगाए गए। ये शिविर हर हफ्ते गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को आयोजित हुए। नोडल अधिकारी और SDM शुभम शर्मा की निगरानी में 16 विभागों के 43 तरह के काम लोगों की पात्रतानुसार मौके पर ही निपटाए गए।

शिविरों में ग्राम पंचायतों की मूलभूत सुविधाओं बिजली, पानी, चिकित्सा, शिक्षा की भी समीक्षा की गई। जो भी शिकायतें आईं, उनका तत्काल समाधान कराया गया। जहां समस्याएं लंबित थीं, वहां संबंधित विभागों को जल्द निपटान के निर्देश दिए गए।

शिविरों में सबसे अधिक आवेदन राजस्व रिकॉर्ड शुद्धिकरण से जुड़े पहुंचे।
भू-राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 136 के तहत कुल 767 प्रार्थना–पत्रों का मौके पर निस्तारण किया गया।
यह धारा भू-अभिलेख अधिकारी को गलत प्रविष्टियों को संबंधित पक्ष की सहमति से ठीक करने का अधिकार देती है।

SDM शर्मा की अपील: “समय रहते विवाद सुलझा लेंगे तो रिश्ते भी बचेंगे और पैसा भी”

SDM शर्मा की अपील: “समय रहते विवाद सुलझा लेंगे तो रिश्ते भी बचेंगे और पैसा भी”
SDM शुभम शर्मा ने शिविरों में लोगों को भूमि विवादों से बचने के लिए कई अहम सुझाव दिए-

संयुक्त खातेदारी जल्द समाप्त करें

पुश्तैनी जमीन संयुक्त रखने से भविष्य में विवाद बढ़ते हैं।
सरकारी योजनाओं के लाभ भी कई बार नहीं मिल पाते।
समय पर बंटवारा करवा लेना ही बेहतर है।

भूमि विवाद से पहले रस्ता तय करे

खेत तक जाने का रास्ता बाद में विवाद का कारण बन जाता है। बंटवारे के दौरान ही रास्ता राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराएं।

विवादों से बचने से पहले रास्ते की पुष्टि करे

विरासत या खरीद- फरोख्त के बाद रास्ते को लेकर झगड़े बढ़ जाते हैं। इससे परिवार टूटते हैं और अदालतों के चक्कर लगते हैं।

विवादों से बचने के लिए समझदारी से काम ले

विरासत या खरीद- फरोख्त के बाद रास्ते को लेकर झगड़े बढ़ जाते हैं। इससे परिवार टूटते हैं और अदालतों के चक्कर लगते हैं।

न्यायालय से जाने से पहले सोचें
जमीन के मामले कोर्ट में सालों चलते हैं।
पैसा भी खर्च होता है और मानसिक तनाव भी बढ़ता है।

भाई बहने के रिश्ते बनाए रखें

उत्तराधिकार कानून के तहत बहनें मुकदमे दायर करती हैं तो परिवार में दूरियां आ जाती हैं।
आपसी सहमति से समाधान निकालना ही अच्छा है।

रास्ते के मामलों में सहयोग जरूर  करे।

खेत तक पहुंचने का रास्ता किसी की जरूरत है, झगड़े की वजह नहीं। पड़ोसियों और रिश्तेदारों के मामलों में सहयोग करने की अपील की।

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