श्रीडूंगरगढ़ टुडे 24 जनवरी 2026
श्रीडूंगरगढ़ निवासी संथारा साधिका श्रीमती रेवती देवी बैद, धर्मपत्नी स्वर्गीय माणिकचन्द बैद का शुक्रवार 24 जनवरी 2026 को स्वर्गवास हो गया। जिनका अंतिम संस्कार कल रविवार को 3 बजे जीवन की अंतिम घड़ियों में उन्होंने नेत्रदान कर मानव सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया और समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गईं।
परम पूज्य युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की पावन आज्ञा से तिविहार संथारा का प्रत्याख्यान स्वीकार करने वाली संथारा साधिका श्रीमती रेवती देवी बैद ने त्याग, तप और करुणा की परंपरा को आत्मसात करते हुए यह अमूल्य वरदान किया।तीन माह पूर्व प्रभारी अशोक झाबक द्वारा उन्हें नेत्रदान की प्रेरणा दी गई थी। जिसे उन्होंने स्वयं पूर्ण श्रद्धा व संकल्प के साथ स्वीकार किया।
स्वर्गवास से एक दिन पूर्व ही उन्होंने स्वयं अपने पुत्र सहित परिवारजनों से बार-बार संथारा एवं नेत्रदान की इच्छा व्यक्त की थी, जो उनके दृढ़ संकल्प और आध्यात्मिक चेतना को दर्शाता है। उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप,परिवारजनों की सहमति से नेत्रदान संपन्न हुआ यह नेत्रदान किसी दृष्टिहीन के जीवन में नई रोशनी, नई दृष्टि और नई आशा का संचार करेगा। यह पुण्य कार्य जैन धर्म की अहिंसा, करुणा एवं परोपकार की भावना को सशक्त रूप में अभिव्यक्त करता है।
नेत्रदान की प्रक्रिया प्राणनाथ हॉस्पिटल आई बैंक के समन्वयक गणेश जी स्वामी व टीम के सहयोग से सफलतापूर्वक पूर्ण की गई।
नेत्रदान हेतु सहमति प्रदान करने वाले परिवारजनों में अशोक कुमार बैद – सुमनदेवी बैद प्रमुख रहे। इस अवसर पर परिषद संयोजक अशोक झाबक सहित समाज के अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में अध्यक्ष विक्रम मालू, उपाध्यक्ष चमन श्रीमाल, सुरेश भादानी, हेमराज झाबक , मोहित बैद, महेंद्र मालू, विकाश मालू, लूणकरण बोथरा ,ललित बाहेती, नारायण बोहरा, प्रज्ञा नाहटा,सरोज दूगड़,सहित बड़ी संख्या में समाजजन एवं परिवारजन उपस्थित रहे।
तेरापंथ युवक परिषद् एवं तेरापंथ किशोर मंडल, श्रीडूंगरगढ़ ने इस अमूल्य वरदान और पुण्य कार्य की हृदय से अनुमोदना करते हुए समाज से नेत्रदान जैसे मानवीय कार्यों को अपनाने का भावपूर्ण आह्वान किया।












