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श्रीडूंगरगढ़ कस्बें  का एक गौभक्त युवा जिसकी जिंदगी ने लिया यू-टर्न  और वापिस खड़ा होकर बना  प्रेरणास्रोत

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श्रीडूंगरगढ़ टुडे 13 मई 2025 – बायोग्राफी आनंद जोशी

आनंद जोशी

यह कहानी है कस्बें के मोमासर बास के एक 33 वर्षीय युवा गौभक्त आनंद जोशी की जो श्रीडूंगरगढ़ शहर का सामाजिक कार्यकर्ता , जागरूक नागरिक गौभक्त और प्रेरणास्त्रोत हैं। आनंद ने अपनी मेहनत और कड़ी लगन से अपनी जिंदगी में बहुत सी सफलता प्राप्त की चाहे वह समाज सेवा,गौसेवा पशु- पक्षियों की सेवा हो या किसी जरूरतमंद की सेवा हो हर जगह हर समय हर परिस्थिति में तैयार रहता है। आनंद जो न केवल एक प्रभावशाली युवा है, बल्कि सौम्य और मिलनसार व्यवहार के कारण शहर के हर नागरिक के दिल मे अपनी जगह बना रखी है।

आनंद को गौभक्त क्यों कहते है। कैसे जिंदगी ने यू टर्न लिया और प्रेरणास्रोत बना शिक्षा, व्यवसाय, शौक, जीवन का मकसद आज जानेंगे गौभक्त आनंद जोशी की जुबानी…..

  • नाम :- आनंद जोशी
  • जन्म :-1 जनवरी 1992
  • शिक्षा:-10th
  • व्यवसाय:- ऑटो रिक्शा
  • मैरिज:- 10 मई 2017
  • माता-पिताः-सांवरमल शारदा देवी जोशी
  • पत्नी/शिक्षा:- 12th कोमल जोशी
  • पुत्रः-2, वीर प्रताप, फतेसिंह जोशी

श्रीडूंगरगढ़ टुडे को आनंद जोशी ने बताया की वो एक साधारण परिवार से आते हैं । और पिताजी घर पर एक छोटी सी किराणा की दुकान चलाते है।माताजी घर का कार्य व गौसेवा करती है। जैसे -तैसे घर खर्चा चलता है। फिर भी सुखी व आनंदमय जीवन हँसी ख़ुशी व्यतीत करते है। साधारण परिवार से आने के बाद भी पिताजी घर पर गायों का पालन करते है। और पिताजी पशु-पक्षियों अबोल जीवों की सेवा करते है। और उन्हीं से प्रेरणा मिली बचपन से ही घर मे गायों को सेवा करने का मौका मिला और फिर धीरे धीरे सभी जीवों की सेवा करने की उम्मीद जाग गई।

युवा 15 वर्ष की आयु में गौसेवा में जुट गया।

आनंद ने श्रीडूंगरगढ़ टुडे को बताया कि जब वह 15 साल का था तब से गौसेवा करने की भावना पैदा हुई और वह गौसेवा करने में लग गया। एक दिन कस्बें के सिंधी कॉलोनी से गुजर रहा था और देखा कि एक गाय एक गहरे नाले में गिरी हुई थी और दर्द से तड़प रही थी गौ माता की ऐसी हालत देखी नही गई और मन मे ख्याल आया कि गौसेवा करना हमारा धर्म हैं , फिर जैसे -तैसे सभी की सहायता से गौमाता को नाले से बाहर निकाला बस उसी दिन में मन बना लिया और अपना प्रयास जारी रखा धीरे धीरे निःस्वार्थ भाव से गौसेवा करते करते सभी अबोल जीवों की सेवा में जुट गया

कुछ झलकिया सेवा कार्य की


एक समय ऐसा भी आया जब जिंदगी का रुख बदल गया

आनंद ने बताया कि गौसेवा करते करते एक समय ऐसा आया जब जिंदगी व मौत से सामना करना पड़ा आनंद ने बताया कि वह दिन कभी नही भूल सकता जब उनके सामने एक गौ माता सहित एक बालक की मौत हो गई। वह उन दोनों को बचा नही सका बात हैं,19 सितंबर 2021 जब मोमासर बास वाल्मीकि समाज के श्मशान भूमि के पास वह अपने घर की तरफ आ रहा था तभी एक ट्रैक्टर आता दिखाई जो तेज रफ्तार व लापरवाही से एक नाबालिग बालिका चला रही थी। जिसके कारण उन्हे लगा कि एक गाय वह एक छोटा बालक ट्रैक्टर के नीचे आ जाएगा और उन्होंने अपनी परवाह किए बिना उन दोनों को बचाने का प्रयास किया और अफसोस उनको बचा नहीं सका। और स्वयं भी उस ट्रैक्टर के नीचे आगया कहते है ना “जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई” आनंद ने बताया कि उसके प्राण बच गए परंतु इस सड़क दुर्घटना में वह बहुत गम्भीर घायल हो गया और वही पर बेहोश हो गया परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुँचे जहाँ पर डॉक्टरों ने तुरंत पीबीएम बीकानेर ट्रोमा सेंटर रैफर कर दिया। और इस सड़क दुर्घटना में उसकी जिंदगी का रुख बदल दिया। इस हादसे में उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और उनके शरीर के आधे हिस्से ने काम करना बंद कर दिया आनंद ने बताया कि उस समय सबने मान लिया था कि अब वह कभी अपनी मदद से खड़ा नहीं हो पाएगा और उसका करियर खत्म हो चुका है।

संघर्ष की कहानी कैसे जंदगी ने लिया यू- टर्न

आनंद ने बताया कि, एक बार उसके मन में भी ख्याल आया कि अब सब कुछ खत्म हो गया सबसे बड़ी बात इस हादसे से ठीक एक दिन पहले उसके छोटे बेटे का जन्म हुआ था और घर मे खुशियों का माहौल था व भी बहुत खुश था लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था और ये हादसा होने से परिवार वाले खुशिया नही माना पाए , फिर अपने उस नन्हें बच्चें पत्नी, माता- पिता परिवार का ख्याल आया और जीने की दृढ़ इच्छा शक्ति का जाहिर करते हुए उसने हार नहीं मानी, तकरीबन डेढ़ साल तक व वेंटिलेटर से बिस्तर पर पड़े रहने के बाद, उन्होंने दृढ़ इच्छाशक्ति और अपने परिवार व मित्रों के सहयोग से फिर से खड़ा होने की ठानी। और खुद को साबित किया कि शारीरिक दुर्बलता किसी के लक्ष्य की राह में आड़े नहीं आ सकती। उनकी कड़ी मेहनत और मानसिक ताकत ने उसे फिर से अपने पैरों पर खड़ा कर दिया।और इस सफर में उसकी पत्नी ने काफ़ी साथ दिया।इस जिंदगी के संघर्ष की लड़ाई में काफी मित्रों ने होंसला बढ़ाया जिसमें विक्रम राजपुरोहित तोलियासर, सम्पत सारस्वत बामनवाली, रमाकांत झंवर अरूण सिखवाल जेसे दोस्तों का अहम योगदान रहा। कुछ समय बाद धीरे धीरे चलना फिरना शुरू किया। और फिर 2022 में पशुओं में लंपि नामक रोग आया जिसमें बहुत सी गायों की मौत हो गई और ये रोग पशुओं में फैल रहा था और गौमाताओं की ऐसी हालत देखी नही गई और हिम्मत जुटाते हुए एक टीम गठित कर सेवा कार्य मे लग गया। उस समय अनगिनत पशुओं की जान बचाई फिर धीरे -धीरे ये कारवां बढ़ता गया और मन मे बस सेवा करने की भावना बढ़ती गई। फ़िर शहर सहित ग्रामीण इलाको से पशु- पक्षियों के लिए कॉल आने शुरू हो गए और सब कुछ छोड़कर उनकी सेवा के लिए निकल जाता और इस प्रकार गौसेवा गौमाता पशु-पक्षियों अबोल जीवों के आशीर्वाद से एकदम स्वस्थ हो गया। और उसी दिन से ये भावना मन मे बना ली कि जब तक शरीर साथ देगा इन अबोल जीवों की सेवा करता रहूँगा।

नन्हें मासूम बच्चों के लिए डेढ़ साल तक जिंदगी से किया संघर्ष लिया यू-टर्न हुआ खड़ा
गौमाताओं में फैले लंपी रोग के दौर में भी आनंद ने टीम के साथ मिलकर की गौसेवा

आंनद ने कहा कि जीवन में हालात चाहे जैसे भी हों, हमें अपने लक्ष्य से भटकना नहीं चाहिए, व्यक्ति को मुश्किलों का सामना और सम्मान करना चाहिए उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों ने उन्हें लाचार समझा और उनसे दूरियां बना लीं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे। उनके संघर्ष और आत्मविश्वास ने उन्हें एक प्रेरणा बना दिया, जो दूसरों को भी कठिन परिस्थितियों में संघर्ष करने की प्रेरणा देता है।

अनेकों सेवा संस्था से जुड़ा है,पर्यावरण प्रेमी भी

वर्तमान में आनंद नर नारायण सेवा संस्थान सहित अनेको संस्थाओं से जुड़ा हुआ है। जहां मानव सेवा के साथ – साथ पशु-पक्षियों, जरूरतमंदों की सेवा में 24×7 सेवा कार्य के लिए तत्तपर रहता है। आनंद संस्था के अलावा अपने स्तर पर भी सेवा कार्य करता है। जैसे पशुओं के लिए खेली , निर्माण हो या उनकी सफाई , गरीब बच्चों को हर समय खाने-पीने के अलावा उनके साथ त्योहार मानना उनको नए कपड़े दिलवाना, यही नही ये युवा पर्यावरण प्रेमी भी है। बहुत से अगणित पेड़- पौधे लगाकर उनकी सेवा व देख रेख का जिम्मा भी उठाता हैं,अनेको सेवाओ से आज भी जुड़ा है। और इसी को अपना शौक व जिंदगी का मकसद मानता है।

नर नारायण सेवा संस्थान के अलावा अपने स्तर पर किए सेवा  कार्य की झलकियां

गौभक्त, के साथ कटर हिन्दू भी कहलाता है।

आनंद गौसेवा के साथ-साथ अपने धर्म के प्रति भी जागरूक है। हर धार्मिक आयोजन , शोभायात्रा में अपनी संस्कृति के अनुसार पोशाक पहनकर पहुंच जाता है। इसके अलावा आनंद कैमल फेस्टिवल में भी हिस्सा लेता है। जहां रोबिनो के लुक के अंदाज में नजर आता है।

युवा के अंदाज निराले

सेवा का सम्मान: आनंद जोशी को राज्यपाल के हाथों मिला देवदूत सम्मान

29 जनवरी 2025 को गौभक्त आनंद जोशी को उनकी सेवाओं को देखते हुए राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराम बागड़े ने जयपुर में एक कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। श्रीडूंगरगढ़ कस्बे के सेवादार आनंद जोशी को जीवों की सेवा, के लिए देवदूत सम्मान से नवाजा गया।

उत्कृष्ट सेवा कार्यों के लिए राज्यपाल के हाथों हुआ सम्मानित

आनंद की कहानी एक प्रेरणा स्रोत मिसाल

आज वर्तमान में आनंद की कहानी एक मिसाल है, जो यह सिद्ध करती है कि अगर मन में ठान लिया जाए तो कोई भी मुश्किल इंसान को उसकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।

आनंद जोशी श्रीडूंगरगढ़ के गौ विधायक

बीकानेर लोकसभा के गौ सांसद विनोद कुमार शर्मा एडवोकेट की अनुशंसा पर राजस्थान के प्रभारी बाबूलाल जांगिड़ ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के आदेशानुसार श्रीडूंगरगढ़ के गौसेवी आनंद जोशी को गौ विधायक नियुक्त किया है।

संघर्ष की जीत हुई मिला न्याय..

सड़क हादसे में आनंद की रीढ़ की हड्डी टूटने के बाद लम्बे समय तक वह कुछ नही कर सकते थे ऐसे में परिवार का भार बच्चों की पढ़ाई मेडिकल ट्रीटमेंट सहित अनेकों खर्चो का साधन बन्द हो गया। उस दौर में बहुत कुछ खोया था बच्चे का प्यार जो उसको डेढ़ साल तक नहीं मिला ऐसे में आनंद के साथ हुए हादसे के लिए सम्पत सारस्वत सहित सर्व समाज ने उनके हक के लिए लम्बी लड़ाई बीकानेर कलेक्टरी तक लड़ी गईं और अंत मे न्याय की जीत हुई वाहन चालक के परिवार द्वारा आनंद को उचित मुआवजा मिला।

सर्व समाज ने हक के लिए किया संघर्ष मिली जीत

श्रीडूंगरगढ़ टुडे टीम युवा के जज्बे को सलाम करती है। साथ ही आशा करती है। वो हमेशा ऐसे ही निःस्वार्थ भाव से 24×7 सेवा करते रहे। जैसी भी परिस्थिति हो।

आभार….

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