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दुल्हन ही दहेज है की प्रेरणा के साथ बिना दहेज के शादी रचाकर दूल्हे ने दिया सामाजिक संदेश

श्रीडूंगरगढ़ टुडे 11 फरवरी 2026

सारस्वत समाज में भी बिना दहेज की शादियाँ हो रही हैं,जो समाज में एक सकारात्मक संदेश दे रही है। ऐसा ही एक सन्देश नर नारायण सेवा संस्थान श्रीडूंगरगढ़ के संस्थापक धनराज शर्मा निवासी जस्सू रोड़ा (नोखा)  ने दिया दहेज न लेने की सोच को सोच तक सीमित न रखते हुए एक विचारधारा बनानी होगी, तभी हमारी आने वाली पीढ़ी इस अभिशाप से मुक्ति पा सकेगी। इस सोच को धरातल पर उतारते हुए धनराज जस्सू  ने अपने पुत्र आर्यन शर्मा की शादी बिना किसी दहेज के पूरी सादगी से संपन्न कराई। यह विवाह गंगाशहर निवासी सजंय कुमार ओझा की पुत्री शीतल  के साथ 10 फरवरी को सम्पन्न हुआ जिसमे दुल्हन की बिदाई से पूर्व समुठनी की रस्म के दौरान शादी की रस्में शुरू हुई तो दुल्हन व दूल्हा पक्ष द्वारा दहेज के खिलाफ पूर्व से ही तय सोच के अनुसार बिना दहेज के  शादी की रस्म सम्पन्न करवाई। जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई इस सार्थक पहल की प्रशंसा शादी समारोह में मौजूद हर व्यक्ति ने की यह विवाह समाज के लिए एक प्रेरणा बनेगा जहां बिना किसी दिखावे और दहेज की मांग के,केवल पारंपरिक रीत -रिवाजों के साथ शादी संपन्न हुई। आर्यन और शीतल दोनों ही  शिक्षा में स्नातक हैं। दोनों परिवारों ने मिलकर यह संदेश दिया कि विवाह किसी भी प्रकार की आर्थिक लेन-देन पर नहीं,बल्कि आपसी प्रेम,सम्मान और समानता पर आधारित होना चाहिए धनराज जस्सू  ने अपने बेटे की शादी में बिना दहेज लेकर यह सिद्ध कर दिया कि “दुल्हन ही दहेज है। की अवधारणा ही सही मायनों में विवाह की गरिमा को परिभाषित करती है। इस विवाह समारोह ने न केवल दहेज जैसी कुप्रथा को नकारा,बल्कि समाज में एक नई सोच को बढ़ावा दिया,जिससे अन्य लोग भी प्रेरित होकर इस दिशा में आगे बढ़ सकें। धनराज जस्सू  ने कहा कि कहा कि आज कल लोग अपना स्टैट्स ऊंचा करने के लिए शादी में अनावश्यक रूप से पैसा, समान आदि ले दे कर मिसाल कायम करने का प्रयास करतें है,जो कि गलत है। इसके लिए हम सभी को दहेज जैसी कुप्रथा को समाप्त करने में आगे आना होगा। बिना दहेज लिए शादी करने पर दोनों पक्षों में अपसी सामंजस्य एवं प्रेम बना रहता है। शादी विवाह दो परिवारों का मेल होता है,इसमें दहेज नामक राक्षस को करीब नहीं आने देना चाहिए शिक्षित लोगों द्वारा भी ऐसा प्रदर्शन करना अफसोस जनक है। कभी-कभी संसाधन के आभाव में सुयोग्य लड़की वालों को मनचाहा वर नहीं मिल पाता। यह विवाह उन लोगों के लिए एक प्रेरणा है, जो दहेज को विवाह का अनिवार्य हिस्सा मानते हैं। इस पहल से समाज में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद की जा रही है। समाज में इस तरह की शादियां होना अच्छी पहल है।

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