Menu
4 मार्च 2026,बुधवार देखें,आज का पंचांग व राशिफल साथ जानें रोजाना और भी नई कुछ खास बातें पंडित नरेश सारस्वत रीड़ी के साथ  |  शाम की देश और राज्यों से बड़ी खबरें एक साथ  |  बीदासर रोड के पास फिसली बाइक, दो युवक घायल  |  मोमासर होली महोत्सव: चंग की थाप पर थिरका शेखावाटी, पाबूसर मंडली ने जीता प्रथम पुरस्कार  |  मोमासर बास में आज फिर गूंजेगा घिन्दड़,मेहरी बनकर आएंगे तो मिलेगा इनाम, देखें फ़ोटो  | 

हाईकोर्ट के आदेश पर सख्ती: राजस्थान में फर्जी शिक्षकों की जांच के लिए समितियों का गठन, दो दिन में रिपोर्ट तलब

Post BannerPost BannerPost BannerPost BannerPost BannerPost BannerPost BannerPost BannerPost BannerPost BannerPost Banner

श्रीडूंगरगढ़ टुडे 13 फरवरी 2026

राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में फर्जी (प्रॉक्सी) शिक्षकों के मामलों को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। उच्च न्यायालय द्वारा एस.बी. सिविल याचिका संख्या 11363/2024 मंजू गर्ग बनाम राजस्थान राज्य व अन्य में पारित आदेशों के अनुपालन में अब प्रदेशभर में विशेष जांच शुरू की जा रही है।

उच्च न्यायालय ने 31 जुलाई 2024 को व्यापक लोकहित में प्रॉक्सी अध्यापकों के विरुद्ध समुचित कार्रवाई के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके बाद 28 अक्टूबर 2025 को पुन: सुनवाई करते हुए न्यायालय ने इन निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए। इसी क्रम में शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार प्रत्येक जिले में प्रॉक्सी शिक्षकों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की जाएगी। इस समिति में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (अध्यक्ष), जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय, प्रारंभिक शिक्षा) तथा संबंधित ब्लॉक के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को शामिल किया गया है।

इसके साथ ही मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों को विद्यालयों के आकस्मिक निरीक्षण के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड गठित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। संपर्क पोर्टल पर प्राप्त प्रॉक्सी शिक्षकों से संबंधित शिकायतों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करना अनिवार्य किया गया है।

जांच के उपरांत सभी जिलों को अपनी रिपोर्ट ई-मेल के माध्यम से samparkportal.ele@gmail.com पर भेजनी होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पालना रिपोर्ट 2 दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से प्रस्तुत की जाए। इस पूरे प्रकरण को “सर्वोच्च प्राथमिकता” देने के निर्देश जारी किए गए हैं।

शिक्षा विभाग का मानना है कि इस कार्रवाई से विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था की पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

home होम live_tv लाइव टीवी
WhatsApp sports_cricket क्रिकेट subscriptions यूट्यूब