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27 फरवरी 2026 शुक्रवार आमलकी एकादशी व्रत आज,देख आज का पंचांग व राशिफल साथ जानें रोजाना और भी नई कुछ खास बातें पंडित नरेश सारस्वत रीड़ी के साथ

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श्रीडूंगरगढ़ टुडे 27 फरवरी 2026

🙏जय श्री गणेशाय नमः🙏

🙏जय श्री कृष्णा🙏

🕉️ आज का पंचांग 🕉️
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🌄 पञ्चाङ्ग 27 _ फरवरी _ 2026 🌄
📅 दिन _ शुक्रवार
📜 कल्प _ श्वेत-वराह
👑 मन्वंतर _ वैवस्वत
⏳ युग _ कलियुग (28वाँ चतुर्युग – प्रथम चरण)
🗓️ विक्रम संवत _ 2082 सिद्धार्थी
📜 शाक संवत _ 1947
🌞 सूर्यायन _ उत्तरायण
🌺 ऋतु _ बसंत
🌼 मास _ फाल्गुन
🌔 पक्ष _ शुक्ल
🗒️ तिथि _ एकादशी रात्रि 10:33 तक तत्पश्चात द्वादशी
✨ नक्षत्र _ आद्रा 10:48 तक तत्पश्चात पुनर्वसु
🔶 योग _ आयुष्मान शाम 07:43 तक तत्पश्चात सौभाग्य
🔸 करण _ वणिज 11:32 तक तत्पश्चात विष्टि
⚫ राहुकाल _ सुबह 11:08 से 12:34:02 तक
🌅 सूर्योदय _ 07:01
🌇 सूर्यास्त _ 06:16
🌤️ सूर्य राशि _ कुम्भ
🌙 चन्द्र राशि _ मिथुन
🧭 दिशाशूल _ पश्चिम दिशा में
🎊 व्रतपर्वविवरण _ आमलकी एकादशी व्रत, बिडकुला ढाल थापना (भद्रा पूर्व), बुध अस्त पश्चिम में
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शुक्रवार के शुभाशुभ_मुहूर्त

⛔ राहुकाल 11:08 – 12:34
⚠️ यमगण्ड 15:31 – 16:56
🔹 गुलीक काल 08:22 – 09:48
⭐ अभिजित 11:50 – 12:35
🚫 दूर मुहूर्त 18:39 – 18:41
🚫 दूर मुहूर्त 18:48 – 18:50

दिनका चौघड़िया

🟢 चर 07:01 – 08:21 शुभ
🟢 लाभ 08:21 – 09:47 शुभ
🟢 अमृत 09:47 – 11:13 शुभ
🔴 काल 11:13 – 12:38 अशुभ
🟢 शुभ 12:38 – 02:04 शुभ
🔴 रोग 02:04 – 03:30 अशुभ
🔴 उद्वेग 03:30 – 04:56 अशुभ
🟢 चर 04:56 – 06:21 शुभ

रातका चौघड़िया

🔴 रोग 06:21 – 07:55 अशुभ
🔴 काल 07:55 – 09:30 अशुभ
🟢 लाभ 09:30 – 11:04 शुभ
🔴 उद्वेग 11:04 – 12:38 अशुभ
🟢 शुभ 12:38 – 02:12 शुभ
🟢 अमृत 02:12 – 03:46 शुभ
🟢 चर 03:46 – 05:20 शुभ
🔴 रोग 05:20 – 06:59 अशुभ

नोटदिन व रात्रि के चौघड़िया का आरंभ
क्रमशः सूर्योदय एवं सूर्यास्त से होता है।
⏳ प्रत्येक चौघड़िया की अवधि — डेढ़ घंटा होती है।

चर में चक्र चलाइये, उद्वेगे थलगार।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे, लाभ में करो व्यापार॥
रोग में रोगी स्नान करे, काल करो भण्डार।
अमृत में काम सभी करो, सहाय करो कर्तार॥

दिनका होरा

💎 शुक्र 07:01 – 08:01
📘 बुध 08:01 – 09:01
🌙 चन्द्र 09:01 – 10:01
🪐 शनि 10:01 – 11:01
📿 गुरु 11:01 – 12:01
🔥 मंगल 12:01 – 13:01
☀️ सूर्य 13:01 – 14:01
💎 शुक्र 14:01 – 15:01
📘 बुध 15:01 – 16:01
🌙 चन्द्र 16:01 – 17:01
🪐 शनि 17:01 – 18:01
📿 गुरु 18:01 – 19:01

रातका होरा

🔥 मंगल 19:01 – 20:01
☀️ सूर्य 20:01 – 21:01
💎 शुक्र 21:01 – 22:01
📘 बुध 22:01 – 23:01
🌙 चन्द्र 23:01 – 24:01
🪐 शनि 24:01 – 01:01
📿 गुरु 01:01 – 02:01
🔥 मंगल 02:01 – 03:01
☀️ सूर्य 03:01 – 04:01
💎 शुक्र 04:01 – 05:01
📘 बुध 05:01 – 06:01
🌙 चन्द्र 06:01 – 06:59

दैनिक राशिफल ✨

देशे ग्रामे गृहे युद्धे
सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं
जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये
यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं
नामराशिं न चिन्तयेत्।।

मेष-आज आत्मविश्वास बढ़ेगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। धन लाभ के संकेत हैं। परिवार में मधुरता रखें।
वृषभ-धैर्य से काम लें। किसी पुराने मित्र से संपर्क होगा। व्यापार में सामान्य लाभ। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
मिथुन-चन्द्रमा आपकी राशि में है, मन प्रसन्न रहेगा। नई योजना शुरू कर सकते हैं। दाम्पत्य जीवन में सौहार्द रहेगा।
कर्क-खर्चों पर नियंत्रण रखें। किसी धार्मिक कार्य में मन लगेगा। यात्रा के योग बन सकते हैं।
सिंह-मान-सम्मान में वृद्धि। नौकरी में प्रशंसा मिलेगी। निवेश सोच-समझकर करें।
कन्या-कार्यभार अधिक रहेगा। अधिकारियों से सहयोग मिलेगा। परिवार में शुभ समाचार मिल सकता है।
तुला-भाग्य का साथ मिलेगा। रुका हुआ कार्य पूर्ण होगा। विद्यार्थियों के लिए दिन अनुकूल।
वृश्चिक-सावधानी से निर्णय लें। वाणी पर संयम रखें। स्वास्थ्य थोड़ा नरम रह सकता है।
धनु-साझेदारी के कार्यों में सफलता। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। व्यापार में लाभ।
मकर-शत्रु परास्त होंगे। कार्यक्षेत्र में प्रगति। व्यर्थ के विवाद से बचें।
कुम्भ-रचनात्मक कार्यों में सफलता। संतान पक्ष से शुभ समाचार। प्रेम संबंधों में मधुरता।
मीन-घर में धार्मिक वातावरण रहेगा। संपत्ति संबंधी लाभ संभव। माता का आशीर्वाद प्राप्त होगा।

आमलकी एकादशी 27 फरवरी 2026 – मोक्षदायिनी व्रत, दिव्य कथा और पूर्ण विधि”
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(फाल्गुन शुक्ल पक्ष)

आमलकी एकादशी महात्म्य ✨

आमलकी यानी आंवला को शास्त्रों में उसी प्रकार श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है, जैसा नदियों में गंगा को और देवों में भगवान विष्णु को प्राप्त है।
भगवान विष्णु ने जब सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा को जन्म दिया, उसी समय उन्होंने आंवले के वृक्ष को भी प्रकट किया। आंवले को भगवान विष्णु ने आदि वृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित किया है। इसके प्रत्येक अंग में ईश्वर का वास माना गया है।
भगवान विष्णु ने कहा है कि जो प्राणी स्वर्ग और मोक्ष की कामना रखते हैं, उनके लिए फाल्गुन शुक्ल पक्ष में आने वाली यह एकादशी अत्यंत श्रेष्ठ है। इसी कारण यह एकादशी आमलकी एकादशी के नाम से विख्यात हुई।

तिथि विवरण

एकादशी तिथि प्रारंभ – 26 फरवरी 2026, रात्रि लगभग 12.33 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त – 27 फरवरी 2026, रात्रि लगभग 10.33 बजे तक

व्रत करने की तिथि – 27 फरवरी 2026, शुक्रवार

पारण (द्वादशी) तिथि – 28 फरवरी 2026 शनिवार सूर्योदय के बाद

🪔 आमलकी एकादशी व्रत विधि 🪔

प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष हाथ में तिल, कुश, मुद्रा और जल लेकर संकल्प करें —
“मैं भगवान विष्णु की प्रसन्नता एवं मोक्ष की कामना से आमलकी एकादशी का व्रत रखता हूँ। मेरा यह व्रत सफलतापूर्वक पूर्ण हो, इसके लिए श्रीहरि मुझे अपनी शरण में रखें।”

संकल्प के पश्चात षोडशोपचार विधि से भगवान की पूजा करें।
भगवान की पूजा के पश्चात पूजन सामग्री लेकर आंवले के वृक्ष की पूजा करें।
वृक्ष के चारों ओर की भूमि को साफ करें।
गाय के गोबर से पवित्र करें।
जड़ में वेदी बनाकर उस पर कलश स्थापित करें।
कलश में देवताओं, तीर्थों एवं सागर का आवाहन करें।
कलश में सुगंधित द्रव्य और पंचरत्न रखें।
उसके ऊपर पंच पल्लव रखें और दीप प्रज्वलित करें।
कलश के कण्ठ में श्रीखंड चंदन का लेप करें और वस्त्र पहनाएँ।
अंत में कलश के ऊपर भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम की स्वर्ण मूर्ति स्थापित करें।
विधिवत रूप से परशुराम जी की पूजा करें।
रात्रि में भगवत कथा, भजन-कीर्तन करते हुए प्रभु का स्मरण करें।

द्वादशी के दिन

ब्राह्मण को भोजन कराएँ।

दक्षिणा दें।

परशुराम की मूर्ति सहित कलश ब्राह्मण को भेंट करें।
इसके पश्चात परायण करके अन्न-जल ग्रहण करें।

आमलकी एकादशी व्रत कथा

अट्ठासी हजार ऋषियों को संबोधित करते हुए सूतजी ने कहा प्राचीन काल में महान राजा मान्धाता ने महर्षि वशिष्ठ से पूछा “हे वशिष्ठजी! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो ऐसा व्रत बताइए जिससे मेरा कल्याण हो।”महर्षि वशिष्ठ ने कहा “हे राजन! सब व्रतों में श्रेष्ठ और अंत में मोक्ष देने वाला आमलकी एकादशी का व्रत है।”राजा ने पूछा “इस व्रत की उत्पत्ति कैसे हुई? इसका विधान क्या है?” महर्षि वशिष्ठ बोले “यह व्रत फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में होता है। इसके प्रभाव से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। इसका पुण्य एक हजार गौदान के समान है। आमलकी की उत्पत्ति भगवान विष्णु के श्रीमुख से हुई है।”

वैदिक नगर की कथा

प्राचीन काल में वैदिक नामक नगर था। वहाँ चारों वर्ण के लोग प्रसन्नता से रहते थे। नगर में सदैव वेदध्वनि गूँजती रहती थी। कोई पापी या दुराचारी न था। वहाँ चैत्ररथ नामक चंद्रवंशी राजा राज्य करता था। उसकी प्रजा विष्णुभक्त थी और प्रत्येक एकादशी का व्रत करती थी। एक बार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी आई। राजा सहित पूरी प्रजा ने व्रत किया। मंदिर में धूप, दीप, नैवेद्य और पंचरत्न से धात्री (आंवला) का पूजन किया गया। रात्रि में जागरण हुआ। उसी समय एक बहेलिया, जो जीव हिंसा से जीवनयापन करता था, भूखा-प्यासा वहाँ आया। भोजन की आशा में मंदिर के कोने में बैठ गया। वहाँ बैठकर उसने भगवान विष्णु की कथा और एकादशी महात्म्य सुना। अनजाने में उसने पूरी रात जागरण किया। कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई। यद्यपि वह पापी था, परंतु आमलकी एकादशी व्रत और जागरण के प्रभाव से वह राजा विदुरथ के यहाँ जन्मा। उसका नाम वसुरथ रखा गया। राजा वसुरथ की रक्षा राजा वसुरथ अत्यंत धर्मात्मा और विष्णुभक्त था।
एक दिन शिकार के समय वह वन में भटक गया और एक वृक्ष के नीचे सो गया। डाकुओं ने उसे घेर लिया और प्रहार करने लगे। परंतु उनके अस्त्र-शस्त्र पुष्प समान प्रतीत हुए।
तभी राजा के शरीर से एक दिव्य देवी प्रकट हुई। उसने क्रोधपूर्वक सभी डाकुओं का संहार कर दिया।
राजा ने आकाशवाणी सुनी “हे राजन! इस संसार में भगवान विष्णु के अतिरिक्त तेरी रक्षा कौन कर सकता है?”
राजा ने भगवान को प्रणाम किया और सुखपूर्वक राज्य करने लगा। महर्षि वशिष्ठ ने कहा  “हे राजन! यह सब आमलकी एकादशी व्रत का प्रभाव था। जो मनुष्य एक भी आमलकी एकादशी का व्रत करता है, वह अंत में वैकुंठ धाम को प्राप्त होता है।”

कथा-सार

श्रीहरि की शक्ति हमारे सभी कष्टों को दूर करती है। यह शक्ति देवताओं की रक्षा में भी समर्थ है।
इसी शक्ति से भगवान विष्णु ने मधु-कैटभ का संहार किया और मुर नामक असुर का वध कर देवताओं को सुख प्रदान किया। आमलकी एकादशी का व्रत मनुष्य को पापों से मुक्त कर मोक्ष की ओर अग्रसर करता है।“जो श्रद्धा से आमलकी एकादशी का व्रत करता है, उस पर श्रीहरि की विशेष कृपा बनी रहती है।”

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