श्रीडूंगरगढ़ टुडे 27 मार्च 2026
वर्तमान युग में प्रत्येक व्यक्ति खुद को श्रेष्ठ मानने लगा है लेकिन ये उस व्यक्ति का दोष है क्योंकि जो व्यक्ति खुद को श्रेष्ठ मानता है वह अपने जीवन में किसी से कुछ भी नहीं सीख पाता है इसलिए कहा जाता है कि सीखने के लिए सुनना पड़ता है और सुनने के लिए धैर्य रखना पड़ता है। आज का दौर अत्यन्त कठिन है न कोई सुनना चाहता है न कोई सीखना चाहता है। हम लोगों को यदि जीवन में ऊँचाइयों को छूना है तो सुनना सीखना ही पड़ेगा विवेकशील मनुष्य कभी भी जीवन में उपेक्षाओं का सामना नहीं करता क्योंकि उस व्यक्ति का अपनी बुद्धि पर नियंत्रण होता है। बुद्धि सबके पास होती है पर उसका उचित उपयोग एक विवेकशील मनुष्य ही कर पाता है इसलिए कहा जाता है कि दूसरे की बात को हमें ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए जिस व्यक्ति के जीवन में त्याग, तपस्था, सहानुभूति, दया, धैर्य, सन्तोष, समर्पण के भाव होते हैं वह व्यक्ति अपने जीवन में निश्चय ही सफल होता है। सुनने से उलझने सुलझ जाती है, जिन्दगी आसान बन जाती है जो संतोषी व्यक्ति होता है उससे दुःख कोसों दूर रहता है। हमें अपने जीवन में प्रेरणास्पद कहानियों पढ़नी चाहिए, साहित्य का अध्ययन करना चाहिए, बोलने में भी अच्छे शब्द चुनने चाहिए। जब हम अपनी आत्मा की बात सुनते हैं तो गलत काम होने की गुंजाइश ही नहीं रहती है अतः हम सबको सुनना सीखना चाहिए।







