Menu
कोटासर श्री करणी गौशाला में रविवार को एकादशी पर दानदाताओं ने बढ़-चढ़कर की गौसेवा  |  शाम की देश और  राज्यों से बड़ी खबरें एक साथ  |  सेसोमूं स्कूल में शिक्षक-अभिभावक समागम : सहयोग से सफलता की ओर  |  राजस्थान स्थापना दिवस समारोह: विचार,विश्वास व विवेक की त्रिवेणी राजस्थान- डॉ. गौरव बिस्सा  |  सेवा समिति के सेवादारों ने पेश की ईमानदारी की मिशाल, एम्बुलेंस में मिला घायल युवक का मोबाइल लौटाया  | 

राजस्थान स्थापना दिवस समारोह: विचार,विश्वास व विवेक की त्रिवेणी राजस्थान- डॉ. गौरव बिस्सा

Post BannerPost BannerPost BannerPost BannerPost Banner

श्रीडूॅंगरगढ़ टुडे 29 मार्च 2026

राष्ट्रभाषा हिंदी प्रचार समिति के संस्कृति भवन में शौर्य, स्वाभिमान और संस्कारों की धरती राजस्थान विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित संभागियों को अपने व्याख्यान से जोड़ते हुए डॉ. चक्रवर्ती श्रीमाली ने वेद परम्परा, लुप्त नदी सरस्वती का स्मरण करते हुए राजस्थान की धरा पर अवतरित पन्नाधाय, मीरा, महाराणा प्रताप व बीकानेर के शासक कर्णसिंह को राजस्थान विकास के विभिन्न उपक्रमों में याद किया।

उन्होंने कहा कि आज का राजस्थान शौर्य को हथियारों से नहीं, बल्कि संकल्प, श्रम और सामूहिक उत्तरदायित्व से परिभाषित हो रहा है। इतिहास प्रसिद्ध राती घाटी युद्ध के रोचक किस्से भी इस अवसर पर साझा किये। संस्था के मंत्री साहित्यकार रवि पुरोहित ने स्वागत उद्बोधन के साथ विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि आज का राजस्थान पर्यटन, हस्तशिल्प, स्टार्ट अप, शिक्षा और डिजिटल नवाचार में अग्रणी है, फिर भी अपनी जड़ों और समृद्ध सांस्कृतिक परम्पराओं से जुड़ा है। इस प्रकार राजस्थान दिवस इसी संतुलन का उत्सव है-जहां अतीत गौरव है, वर्तमान उत्तरदायित्व और भविष्य संभावना।

मुख्य अतिथि शिक्षाविद् मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. गौरव बिस्सा ने वीर प्रसूता धरा राजस्थान की गौरवमयी परम्परा को तथ्यों और तर्कों के साथ प्रस्तुत किया। बिस्सा ने कहा तेरह वर्षीय बालिका काली बाई, मां अमृता व सहल कंवर का बलिदान विश्व में एकमात्र उदाहरण में गिना जाता है। ठीक इसी प्रकार गोविन्द गिरी के नेतृत्व में आयोजित सम्प सभा के दौरान हुए बलिदान कोई सानी नहीं। अपने उद्बोधन में डॉ. बिस्सा नेविचार, विश्वास व विवेक की त्रिवेणी राजस्थान को अनेक ऐतिहासिक प्रसंगों के माध्यम से व्याख्यायित किया। विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद् पुष्पा शर्मा ने वीर दुर्गादास, रानी पद्मिनी का उदाहरण देते हुए लोक कला व संस्कृति पर अपने विचार रखे।

संस्थाध्यक्ष श्याम महर्षि ने राजस्थान के लोक व परम्परा की समृद्धि के साथ ऐतिहासिक व मिथकीय साहित्य के सन्दर्भों को प्रस्तुत किया। साथ ही राजस्थान के लोक रंजन व लोक साहित्य में व्याप्त सांस्कृतिक वैभव व स्थापित परम्पराओं का उल्लेख किया। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद् डॉ. कमल कोठारी ने राजस्थान की रंगत स्वरचित 40 दोहों के माध्यम से बखानी, जिसमें राजस्थान के एकीकरण, गौरवमयी इतिहास, कला व लोक संस्कृति का अनूठा चित्रण शामिल था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप मंत्र व मां शारदे की वन्दना से हुआ। समारोह का संचालन युवा कवयित्री भगवती पारीक ‘मनु’ ने और आभार ज्ञापन लेखिका सरोज शर्मा ने किया।


समारोह में डॉ. मदन सैनी, सत्यनारायण योगी, भंवर भोजक, सत्यदीप, श्रीभगवान सैनी, अनिल सोनी, रामचन्द्र राठी, राजेश सारस्वत, सुनील खांडल, नारायण शर्मा, विजय महर्षि, मुकेश सैनी, बालकिशन, राजीव श्रीवास्तव, बजरंग शर्मा, शुभकरण पारीक, सत्यनारायण स्वामी, रमाकांत झंवर, डॉ. मनीष सैनी, राजू शर्मा, महावीर सारस्वत सहित अनेक विद्वानों, शिक्षाविद्ेां और साहित्यकारों के साथ आम जन ने सहभागिता निभाई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

home होम live_tv लाइव टीवी
WhatsApp sports_cricket क्रिकेट subscriptions यूट्यूब