श्रीडूंगरगढ़ टुडे 30 सितंबर 2025
पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है। शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है। पंचांग में सूर्योदय सूर्यास्त, चद्रोदय-चन्द्रास्त काल, तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त योगकाल, करण, सूर्य-चंद्र के राशि, चौघड़िया मुहूर्त दिए गए हैं।
🙏जय श्री गणेशाय नमः🙏
🙏जय श्री कृष्णा🙏
🕉️आज का पंचांग-30.09.2025🕉️
✴️दैनिक गोचर राशिफल सहित✴️
🕉️ शुभ मंगलवार 🌞 – शुभ प्रभात् 🕉️
74-30💥मध्यमान💥75-30
(केतकी चित्रापक्षीय गणितानुसारेण निर्मितम्)
आज विशेष
वाणी का प्रयोग..प्रस्तुति परिणाम एवं महत्व
दैनिक पंचांग विवरण
आज दिनांक……………….. .30.09.2025
कलियुग संवत्…………………………5127
विक्रम संवत्…………………………. 2082
शक संवत्……………………………..1947
संवत्सर…………………………. श्री सिद्धार्थी
अयन…………………………………..दक्षिण
गोल………………………. …………..दक्षिण
ऋतु……………………………………. .शरद्
मास…………………………………. आश्विन
पक्ष…………………………………… .शुक्ला
तिथि…….. अष्टमी. सायं. 6.07 तक / नवमी
वार………………………………… मंगलवार
नक्षत्र…………… पूर्वाषाढ़ा. संपूर्ण (अहोरात्र)
चंद्रमा…………………. धनु. संपूर्ण (अहोरात्र)
योग….. शोभन. रात्रि. 1.02* तक/ अतिगंड
करण……….. बव. सायं. 6.07 तक / बालव
नोट-जिस रात्रि समय के ऊपर(*) लगा हुआ हो
वह समय अर्द्ध रात्रि के बाद सूर्योदय तक का है।
विभिन्न नगरों के सूर्योदय में समयांतर मिनट
दिल्ली -10 मिनट———जोधपुर +6 मिनट
जयपुर -5 मिनट——अहमदाबाद +8 मिनट
इंदौर – 4 मिनट————-मुंबई +7 मिनट
लखनऊ – 25 मिनट——बीकानेर +5 मिनट
कोलकाता -54 मिनट–जैसलमेर +15 मिनट
सूर्योंदयास्त दिनमानादि-अन्य आवश्यक सूची
सूर्योदय…………………. प्रातः 6.24.17 पर
सूर्यास्त…………………..सायं. 6.18.02 पर
दिनमान-घं.मि.से……………….. 11.53.45
रात्रिमान………………………….12.06.39
चंद्रोदय…………………..1.43.07 PM पर
चंद्रास्त………………… 12.11.54 AM पर
राहुकाल.अपरा. 3.20 से 4.49 तक(अशुभ)
यमघंट…प्रातः 9.23 से 10.52 तक(अशुभ)
गुलिक.अपरा.12.21 से 1.50 (शुभे त्याज्य)
अभिजित…..मध्या.11.57 से 12.45(शुभ)
पंचक………………………….. आज नहीं है।
हवन मुहूर्त………………………… ..आज है।
दिशाशूल……………………….. .उत्तर दिशा
दोष परिहार….. .गुड़ का सेवन कर यात्रा करें
🌄विशिष्ट काल-मुहूर्त-वेला परिचय🌄
अभिजित् मुहुर्त – दिनार्द्ध से एक घटी पहले और एक घटी बाद का समय अभिजित मुहूर्त कहलाता है,पर बुधवार को यह शुभ नहीं होता
ब्रह्म मुहूर्त – सूर्योदय से पहले का 1.30 घंटे का समय ब्रह्म मुहूर्त कहलाता है।
प्रदोष काल – सूर्यास्त के पहले 45 मिनट और
बाद का 45 मिनट प्रदोष माना जाता है।
गौधूलिक काल-सूर्यास्त से 12 मिनट पहले एवं
12 मिनट बाद का समय कहलाता है।
🌄✴️भद्रा वास शुभाशुभ विचार✴️🌄
भद्रा मेष, वृष, मिथुन, वृश्चिक के चंद्रमा में स्वर्ग में व कन्या, तुला, धनु, मकर के चंद्रमा में पाताल लोक में और कुंभ, मीन, कर्क, सिंह के चंद्रमा में मृत्युलोक में मानी जाती है यहां स्वर्ग और पाताल लोक की भद्रा शुभ मानी जाती हैं और मृत्युलोक की भद्रा काल में शुभ कार्य वर्जित होते हैं इसी तरह भद्रा फल विचार करें..
✴️सूर्योदय कालीन लग्न एवं ग्रह स्पष्ट✴️
लग्न ……………..कन्या 12°27′ हस्त 1 पू
सूर्य …………… कन्या 12°55′ हस्त 1 पू
चन्द्र …………..धनु 13°24′ पूर्वाषाढ़ा 1 भू
बुध ^ ……………कन्या 25°27′ चित्रा 1 पे
शुक्र ……..सिंह 18°41′ पूर्व फाल्गुनी 2 टा
मंगल ………………तुला 11°1′ स्वाति 2 रे
बृहस्पति ………मिथुन 28°8′ पुनर्वसु 3 हा
शनि * ……. मीन 3°42′ उत्तरभाद्रपद 1 दू
राहू * …….कुम्भ 22°57′ पूर्वभाद्रपद 1 से
केतु * …..सिंह 22°57′ पूर्व फाल्गुनी 3 टी
✴️🌄दिन का चौघड़िया🌄✴️
चंचल…………..प्रातः 9.23 से 10.52 तक
लाभ………….प्रातः 10.52 से 12.21 तक
अमृत…………..पूर्वा. 12.21 से 1.50 तक
शुभ…………… अपरा. 3.20 से 4.49 तक
✴️🌄रात्रि का चौघड़िया🌄✴️
लाभ…………….. रात्रि. 7.49 से 9.20 तक
शुभ……..रात्रि. 10.51 से 12.21 AM तक
अमृत..रात्रि. 12.21 AM से 1.52 AM तक
चंचल….रात्रि. 1.52 AM से 3.23 AM तक
(विशेष – ज्योतिष शास्त्र में एक शुभ योग और एक अशुभ योग जब भी साथ साथ आते हैं तो शुभ योग की स्वीकार्यता मानी गई है )
🌞🕉️शुभ शिववास की तिथियां🕉️🌞
शुक्ल पक्ष-2—–5—–6—- 9——-12—-13.
कृष्ण पक्ष-1—4—-5—-8—11—-12—-30.
दिन नक्षत्र एवं चरणाक्षर संबंधी संपूर्ण विवरण
संदर्भ विशेष -यदि किसी बालक का जन्म गंड नक्षत्रों (रेवती, अश्विनी, अश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा और मूल) में होता है तो सविधि नक्षत्र शांति की आवश्यक मानी गयी है और करवाना चाहिये..
आज जन्मे बालकों का नक्षत्र के चरण के समय समय के नुसार राशिगत् नामाक्षर….
समय-नक्षत्र नाम-नक्षत्र चरण-चरणाक्षर
12.47 PM तक—पूर्वाषाढ़ा—1——–भू
07.16 PM तक—पूर्वाषाढ़ा—2——–धा
12.42 AM तक—पूर्वाषाढ़ा—3——-फा उपरांत रात्रि तक—पूर्वाषाढ़ा—4——–ढ़ा
राशि धनु – पाया ताम्र_
आज का दिन
व्रत विशेष…..शरद् नवरात्रि व्रतानुष्ठान् जारी
नवरात्रि क्रम………..अष्टम् (महागौरी पूजा)
अन्य व्रत……………………………. नहीं है।
पर्व विशेष…………… श्री सरस्वती पूजनम्.
पर्व विशेष……….महाष्टमी /दुर्गाष्टमी पूजन
दिन विशेष………………….चातुर्मास जारी
दिन विशेष…….. अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस
दिन विशेष………………. राष्ट्रीय प्रेम दिवस
पंचक…………………………..आज नहीं है
विष्टि(भद्रा)…………………….आज नहीं है खगोलीय………… वर्तमान सूर्य नक्षत्र(हस्त)
नक्षत्र वाहन…………….. चातक.वर्षा (श्रेष्ठ)
खगोलीय…………………….. आज नहीं है।
सर्वा.सि.योग…………………. आज नहीं है।अमृ.सि.योग………………….. आज नहीं है।
सिद्ध रवियोग………………… आज नहीं है।
अगले दिन की प्रतीकात्मक जानकारी
आज दिनांक……………….01.10.2025
तिथि………. आश्विन शुक्ला नवमा बुधवार
व्रत विशेष.. शरद् नवरात्रि व्रतानुष्ठान् संपूर्ण
नवरात्रि क्रम…….. नवम् (सिद्धिदात्री पूजा)
अन्य व्रत……………………………. नहीं है।
पर्व विशेष…. सरस्वती बलिदानं. 8.06 उप.
पर्व विशेष………………श्री दुर्गानवमी पूजा
दिन विशेष………………….चातुर्मास जारी
दिन विशेष……2025 अक्टूबर मास प्रारंभ
दिन विशेष..राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस
दिन विशेष…….. अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस
दिन विशेष………. अंतर्राष्ट्रीय काॅफी दिवस
पंचक………………………….आज नहीं है।
विष्टि(भद्रा)……………………आज नहीं है। खगोलीय…………वर्तमान सूर्य नक्षत्र(हस्त)
नक्षत्र वाहन……………..चातक.वर्षा (श्रेष्ठ)
खगोलीय…………………….. आज नहीं है।
सर्वा.सि.योग…………………. आज नहीं है।अमृ.सि.योग…………………. आज नहीं है।
सिद्ध रवियोग….. प्रातः 8.06 से रात्रि पर्यंत
✴️आज की विशेष प्रस्तुति✴️
💥धर्म ज्योतिष वास्तु एवं गोचर राशिफल 💥
वाणी का प्रयोग..प्रस्तुति परिणाम एवं महत्व
हमारी वाणी मधुर और विनय-युक्त होनी चाहिए – यह हमें हमारे माता-पिता, आचार्य, आदि, बचपन से बताते आ रहे हैं । परन्तु वाणी के और क्या-क्या गुण होने चाहिए और, उससे भी महत्त्वपूर्ण, क्यों होने चाहिए – यह लेख इन विषयों की चर्चा करता है ।
वाणी के गुणों के ऊपर हमें क्यों विशेष ध्यान देना चाहिए, पहले इसी की चर्चा करते हैं । मनुष्य और पृथ्वी पर बसने वाले अन्य प्राणियों में एक स्पष्ट भेद है – मनुष्य बहुत प्रकार के स्वर मुख से निकालने में सक्षम है, और इस क्षमता के आधार पर वह बहुत क्लिष्ट भाषा बोलता है । इस भाषा से जो उसने देखा या अनुभव किया है, वही नहीं, अपितु जो अनदेखा और अनछुआ है, उसका भी चित्र खींच देता है । बोलता ही नहीं, अपितु उसका चिन्तन ही भाषा पर आधारित है । यदि आपकी भाषा विकसित न हो, तो आपकी सोच भी सीमित रहेगी । इसका सबसे अच्छा उदाहरण अफ्रीका की एक जनजाति में मिला । इस जनजाति का नाम था ’हौटैन्टौट’, और इनका सम्पर्क युरोप-निवासियों से सत्रहवीं सदी में हुआ, जब इनकी सभ्यता के विषय में विश्व को भी कुछ ज्ञात हुआ । अभी तो यह लुप्तप्राय ही हो गई है । इनकी भाषा में संख्या के लिए शब्द थे – एक, दो, फिर अनेक, अर्थात् दो के बाद इनकी भाषा में गिनती के लिए कोई शब्द नहीं था । इस कारण से इस जाति में गणित कभी विकसित ही नहीं हो पाई ! हां, अवश्य ही भाषा और ज्ञान, दोनों साथ-साथ चलते हैं – भाषा के आधार पर हम नई चीज़ें सोचते हैं, फिर उन नई चीज़ों के लिए नए शब्द बनाते हैं, जैसे ’रेल’ या ’मोटर’ । परन्तु, पहली आवश्यकता सक्षम भाषा की है । यदि भाषा हमारी पंगु होगी, तो हमारी सोच भी उड़ान नहीं भर सकती !
यहीं पर वेदों का भारतीयों पर महान उपकार है। संस्कृत जैसी प्रबल भाषा के कारण ही भारतीयों का ज्ञान एक समय में विश्व-प्रसिद्ध था । जब सारा विश्व गुफा से बाहर ही निकल पाया था, भारतीय चांद-तारों के मार्ग नाप रहे थे ! इसीलिए वेदों ने भाषा, या वाणी, की महानता पर बहुत बल दिया है । वेद कहता है कि ’वाणी को दोहिये’ – "यद्वाग्वदन्त्यविचेतनानि राष्ट्री देवानां निषसाद मन्द्रा । चतस्र ऊर्जं दुदुहे पयांसि क्वस्विदस्याः परमं जगाम ॥" ( ऋक्० ८।१००।१०)
अर्थात् जो वाणी अज्ञात पदार्थों को बतलाने वाली, विद्वान् लोगों की स्वामिनी और प्रसन्नता को देनी वाली होती है, वह अपने प्रभाव से चारों ओर ऊर्जा, अन्न और रस को दुहती है । वाणी ज्ञान और मधुरता फैलाकर मनुष्यों को समृद्ध और प्रफुल्लित कर देती है – वह इतनी शक्तिशाली है !
“देवीं वाचमजनयन्त देवास्तां विश्वरूपाः पशवो वदन्ति ।
सा नो मन्द्रेषमूर्जं दुहाना धेनुर्वागस्मानुप सुष्टुतैतु ॥”
( ऋक्० ८।१००।११ )
अर्थात् वाणी तो अनेक प्रकार की होती है, और उसके कुछ रूप पशु भी बोलते हैं । परन्तु विद्वान लोग तो ’देवीं वाचं’ = उत्कृष्ट भाषा ही बोलते हैं, जो कि बोलने वाले को और सुनने वाले को – दोनों को ही प्रसन्न कर देती है, और उनके लिए अन्न, रस व ऊर्जा दुहती है । ऐसी ही वाणी हमें भी बोलनी उपयुक्त है ।
जब वाणी मनुष्य-जीवन को इतना प्रभावित करती है, तो स्पष्ट ही है कि हमें हर शब्द अत्यन्त ध्यान से बोलना चाहिए, अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर बोलना चाहिए – "सक्तुमिव तित-उना पुनन्तो यत्र धीरा मनसा वाचमक्रत । अत्रा सखायः सख्यानि जानते भद्रैषां लक्ष्मीर्निहिताधि वाचि ॥" ( ऋक्० १०।७१।२ )
अर्थात् धीर = मनस्वी ऋषि लोग मन से विचारों को, छन्नी से साफ करते हुए के समान, वाणी में बदलते हैं । उनके द्वारा शब्द और अर्थ प्रत्यक्ष होता है । इसलिए उनकी वाणी में हितकारी ज्ञान निहित होता है ।
अब वाणी के गुण देखते हैं । मनु ने इनको स्पष्टतम बताया है – "सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात् सत्यमप्रियं । प्रियं च नानृतं ब्रूयादेष धर्मः सनातनः ॥" ( मनुस्मृतिः ४।१३८ )
अर्थात् सत्य बोलें और प्रिय बोलें; अप्रिय सत्य न बोलें, और न ही प्रिय झूठ । यही सनातन धर्म है । आजकल हम ये प्रायः भूल ही गये हैं कि सत्य बोलना धर्म है, और झूठ बोलना पाप । जहां भी मैं सत्य बोलने के ऊपर प्रवचन देती हूं, वहां सभी श्रोता मेरी बात को नकार करके कहते हैं कि प्रिय झूठ बोलने में, या किसी अच्छे जन को बचाने आदि की स्थिति में झूठ बोलने में कोई बुराई नहीं है । कुछ दिन पहले, एक पण्डितजी ने इस प्रकार भी खण्डन किया कि गुप्तचर के लिए तो झूठ बोलना आवश्यक ही है, वह उसका धर्म ही है; सो, आपका कथन सही नहीं कि किसी भी दशा में झूठ सही नहीं । मैं कहते-कहते थक जाती हूं कि पहला सुविधा के अन्तर्गत आता है, और दूसरा आपत्धर्म के अन्तर्गत आता है । सुविधा इस लिए कि जब हम किसी का हृदय नहीं तोड़ना चाहते तो अप्रिय सत्य बोल देते हैं – “बहनजी, खाना बहुत अच्छा बना है”; और जब हम सत्य से जीत नहीं सकते तो झूठ का सहारा लेते हैं – “अश्वत्थामा (हाथी) मारा गया” । ये हमारी कमज़ोरियां हैं, धर्म नहीं है । धर्म तो एक ही है और रहेगा – जो जैसा है उसका वैसा ही जानना, मानना व कहना । परन्तु आजकल हम झूठ बोलने के इतने आदि हैं कि इसको गलत मानना ही हमारे लिए कठिन होता जा रहा है ! हमें अपने को अधिक बलवान बनाना है कि हमें झूठ का सहारा न लेना पड़े, और जब तक हम इतने बलवान् नहीं हो जाते, तब तक हमारे ’सफेद झूठ’ से कुछ पाप तो लगेगा ही !"भद्रं भद्रमिति ब्रूयाद्भद्रमित्येव वा वदेत् । शुष्कवैरं विवादं च न कुर्यात् केनचित् सह ॥" ( मनुस्मृतिः ४।१३९ )
इस अगले श्लोक में मनु कहते हैं कि या तो भद्र (हितकारी) और भद्र (प्रिय) सत्य बोलो, परन्तु ये न हो सके तो केवल भद्र (हितकारी) ही बोलो । अर्थात् कभी-कभी हमारा कर्तव्य बनता है कि हम अप्रिय सत्य भी बोलें, यदि वह सुननेवाले के लिए हितकारी हो । विदुर जब धृतराष्ट्र को महाभारत के युद्ध से विमुख करने का परामर्श देना चाहते थे, तो उन्होंने कहा – "पुरुषा बहवो राजन् सततं प्रियवादिनः । अप्रियस्य तु पथ्यस्य वक्ता श्रोता च दुर्लभः ॥" ( महभारत उद्योगपर्वः )
अर्थात् हे राजन् ! सर्वदा प्रिय बोलने वाले (चापलूसी करने वाले) तो बहुत लोग होते हैं, परन्तु अप्रिय सत्य को बोलने वाले और उसको सुनने वाले दुर्लभ होते हैं । राजा के परिपेक्ष में तो चापलूसों की संख्या अधिक होती है, परन्तु हमारे छोटे संसार में भी ऐसे कई व्यक्ति हमें सब ओर मिल जाते हैं । दूसरी ओर, जो विदुर ने अप्रिय सुनने वाले श्रोता की बात कही, वह भी कितनी सत्य है ! इसी कारण से तो हम सबसे ’सफेद झूठ’ बोलते रहते हैं !
सो, हितकारी होना वाणी के लिए अधिक आवश्यक है, चाहे वह अप्रिय सत्य क्यों न हो । मनु और भी शिक्षा देते हैं –"नारुंतुदः स्यादार्तोऽपि न परद्रोहकर्मधीः । ययास्योद्विजते वाचा नालोक्यां तामुदीरयेत् ॥" ( मनुस्मृतिः २।१६१)
अर्थात् चाहे स्वयं कितने भी कष्ट में हो, उस वाणी का प्रयोग मत करो जिससे कोई उद्विग्न या दु:खित हो । पहली पंक्ति को भी वाणी में घटाएं तो यह भी अर्थ बनता है – किसी की दुखती रग पर (शब्दों से) हाथ मत रखो, और भड़काने वाली भाषा मत बोलो । मनु के अनुसार वाणी का बाण सोच-समझ कर कमान में से निकालना चाहिए –
“यस्य वाङ्-मनसी शुद्धे सम्यग्गुप्ते च सर्वदा
स वै सर्वमवाप्नोति वेदान्तोपगतं फलम् ॥”
( मनुस्मृतिः २।१६०)
अर्थात् जो अपनी वाणी और मन को सर्वदा कपट, असत्य, द्वेष, क्रोध, आदि, से रहित रखता है, और अपने वशमें रखता है – निरर्थक और अधिक नहीं बोलता है – वह निश्चय से वेदों में बताये सुखद फल को पूर्णतया प्राप्त करता है । वस्तुतः, वाणी का जन्म-स्थान मन ही है । सो, जो अशुद्ध बात मन में आ गई, वह कभी मुख तक आ सकती है । और जो आवेश में, हम कुछ अनाप-शनाप बोल गये, तो मन के रास्ते से, वह कार्यान्वित भी हो सकती है । इस प्रकार सम्बद्ध होने से, मन और वाणी को अनेक बार एक-साथ रखा जाता है । दूसरे, वाणी का कम प्रयोग तभी सम्भव है, जब हम बकवास न करे, अर्थात् प्रासंगिक बोले – जहां जितना आवश्यक है, उतना ही बोलें ।
इस प्रकार वाणी के मुख्य गुण हैं –
√★१) हितकारी
√★२) सत्य
√★३) प्रिय / मधुर
√★४) प्रासंगिक
वस्तुतः, वाक्शक्ति मनुष्यों को परमात्मा की एक महान देन है । उसका गलत या मनमाना प्रयोग करके, हम उस देन का अनादर करते हैं, और दुःख के भागी बनते हैं । जहां संसार का अधिकतर व्यवहार वाणी से चलता है, वहां इसी साधन से ज्ञानार्जन किया जाता है । ये दो तभी हो सकते हैं जब वाणी हितकारी और सत्य हो । असत्य पाप ही नहीं होता, अपितु हमारे मन में भी विकार उत्पन्न करके हमें रोगों की ओर धकेलता है । इसलिए सदा सोच-समझकर वाणी का प्रयोग कीजिए।
✴️ 🕉️आज का राशिफल🕉️ ✴️
मेष-(चू चे चो ला ली लू ले लो अ)
आज अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए व्यक्तिगत संबंधों का उपयोग करना आपके जीवनसाथी को नाराज़ कर सकता है। किसी करीबी दोस्त की मदद से आज कुछ करोबारियों को अच्छा-खासा धन लाभ होने की संभावना है। यह धन आपकी कई परेशानियों को दूर कर सकता है। एक बेहतरीन शाम के लिए रिश्तेदार/दोस्त घर आ सकते हैं। यह दिन प्रसन्नता और ज़िन्दादिली के साथ किसी ख़ास संदेश को भी देगा । रचनात्मक काम में लगे लोगों के लिए सफलता से भरा दिन है, उन्हें वह शौहरत और पहचान मिलेगी जिसकी उन्हें एक अरसे से तलाश थी। आपमें से कुछ लोगों को लंबा सफ़र करना पड़ सकता है – जो काफ़ी दौड़-भाग भरा होगा – लेकिन साथ ही बहुत फ़ायदेमंद भी साबित होगा। अगर आप कोशिश करें तो आप अपने जीवनसाथी के साथ अपने जीवन का सबसे अच्छा दिन आज गुज़ार सकते हैं।
वृषभ-(इ उ एओ वा वी वू वे वो).
आज जब सेहत से जुड़ा मामला हो तो ख़ुद को अनदेखा नहीं करना चाहिए और सावधानी बरतनी चाहिए। आज निवेश के जो नए अवसर आपकी ओर आएँ, उनपर विचार करें। लेकिन धन तभी लगाएँ जब आप उन योजनाओं का भली-भांति अध्ययन कर लें। अपने बर्ताव में उदार बनें और परिवार के साथ प्यार भरे लम्हे गुज़ारें। अपने रोमांटिक ख़यालों को हर किसी को बताने से बचें। यह उन अच्छे दिनों में से एक दिन है जब कार्यक्षेत्र में आप अच्छा महसूस करेंगे। आज आपके सहकर्मी आपके काम की तारीफ करेंगे और आपका बॉस भी आपके काम से खुश होगा। कारोबारी भी आज कारोबार में मुनाफा कमा सकते हैं। इस राशि के जातक आज के दिन अपने भाई-बहनों के साथ घर पर कोई मूवी या मैच देख सकते हैं। ऐसा करके आप लोगों के बीच प्यार में वृद्धि होगी। अपने जीवनसाथी को सरप्राइज़ देते रहें, नहीं तो वह ख़ुद को आपके जीवन में महत्वहीन समझ सकता है।
मिथुन- (क की कू घ ङ छ के को ह)
आजखाते-पीते वक़्त सावधान रहें। लापरवाही बीमारी की वजह बन सकती है। रुका हुआ धन मिलेगा और आर्थिक हालात में सुधार आएगा। अनचाहे मेहमानों से शाम को आपका घर भरा रह सकता है। हर रोज़ प्रेम में पड़ने की अपनी आदत को बदलिए। आपके पास आज अपनी क्षमताओं को दिखाने के मौक़े होंगे। टैक्स और बीमे से जुड़े विषयों पर ग़ौर करने की ज़रूरत है। असहजता की वजह से आप वैवाहिक जीवन में ख़ुद को फँसा हुआ अनुभव कर सकते हैं। आपको ज़रूरत है तो जीवनसाथी के साथ आत्मीय बातचीत की।
कर्क- (ही हू हे हो डा डी डू डे डो)
आज आपके जल्दी ही बीमारी से उबरने की संभावना है। आज आप आसानी से पैसे इकट्ठा कर सकते हैं- लोगों को दिए पुराने कर्ज़ वापिस मिल सकते हैं- या फिर किसी नयी परियोजना पर लगाने के लिए धन अर्जित कर सकते हैं। अपने परिवार को पर्याप्त समय दें। उन्हें महसूस होने दें कि आप उनका ख़याल रखते हैं। उनके साथ अच्छा वक़्त बिताएँ और शिकायत करने का मौक़ा न दें। जो भी बोलें, सोच-समझकर बोलें। क्योंकि कड़वे शब्द शांति को नष्ट करके आपके और आपके प्रिय के बीच दरार पैदा कर सकते हैं। व्यवसायियों के लिए अच्छा दिन है, क्योंकि उन्हें अचानक बड़ा फ़ायदा हो सकता है। परोपकार और सामाजिक कार्य आज आपको आकर्षित करेंगे। अगर आप ऐसे अच्छे कामों में थोड़ा समय लगाएँ, तो काफ़ी सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। आपकी बीती ज़िन्दगी का कोई राज़ आपके जीवनसाथी को उदास कर सकता है।
सिंह- (मा मी मू मे मो टा टी टू टे)
आज गर्भवती महिलाओं के लिए अतिरिक्त सावधान रहने का दिन है। व्यापार को मजबूती देने के लिए आज आप कोई अहम कदम उठा सकते हैं जिसके लिए आपका कोई करीबी आपकी आर्थिक मदद कर सकता है। बहन का स्नेह आपको प्रोत्साहन देगा। लेकिन छोटी-मोटी बातों पर आपा खोने से बचें, क्योंकि इससे आपके हितों को नुक़सान पहुँचेगा। अपना बायोडाटा भेजने या किसी इंटरव्यू में जाने के लिए अच्छा समय है। आज आप व्यस्त दिनचर्या के बावजूद भी अपने लिए समय निकाल पाने में समर्थ होंगे और इस खाली समय में अपने परिवार वालों के साथ गुफ्तगू कर सकते हैं।
कन्या- (टो प पी पू ष ण ठ पे पो)
आज आप शारीरिक लाभ के लिए, विशेषकर मानसिक तौर पर मज़बूती हासिल करने के लिए ध्यान और योग का आश्रय लें। आज किया गया निवेश आपकी समृद्धि और आर्थिक सुरक्षा में वृद्धि करेगा। ऐसा दिन है जब काम का दबाव कम रहेगा और आप परिवार के साथ समय बिताने का मज़ा ले पाएंगे। आपके प्रिय के कड़वे शब्दों के कारण आपका मूड ख़राब हो सकता है। नए ग्राहकों से बात करने के लिए बेहतरीन दिन है। मौज-मस्ती के लिए घूमना संतोषजनक रहेगा। आपका जीवनसाथी रोज़ाना की ज़रूरतों को पूरा करने से अपने हाथ पीछे खींच सकता है, जिसके चलते आपका मन उदास होने की संभावना है।
तुला- (रा री रू रे रो ता ती तू ते)
आज मौज-मस्ती और मनपसंद काम करने का दिन है। इस राशि के विवाहित जातकों को आज ससुराल पक्ष से धन लाभ होने की संभावना है। अपने घर के वातावरण में कुछ बदलाव करने से पहले आपको सभी की राय जानने की कोशिश करनी चाहिए। अपने प्रिय की बेजा मांग के आगे न झुकें। प्रतिस्पर्धा में बढ़त के लिए व्यवसायियों को नई योजनाओं और रणनीतियों पर काम करने की ज़रूरत है। जिन रिश्तों को आप अहमियत देते हैं उन्हें समय देना भी आपको सीखना होगा नहीं तो रिश्ते टूट सकते हैं। आपका जीवनसाथी आपकी ज़रूरतों को अनदेखा कर सकता है, जिसके चलते आप चिड़चिड़े हो सकते हैं।
वृश्चिक- (तो ना नी नू ने नो या यी यू)
आपके लिए आज ख़ास दिन है, क्योंकि अच्छा स्वास्थ्य आपको कुछ असाधारण काम करने की क्षमता देगा। जो लोग दुग्ध उद्योग से जुड़े हैं उन्हें आज आर्थिक लाभ होने की प्रबल संभावना है। ऐसे कामों में सहभागिता करने के लिए अच्छा समय है, जिसमें युवा लोग जुड़े हों। आपकी थकी और उदास ज़िन्दगी आपके जीवन-साथी को तनाव दे सकती है। सहकर्मियों और वरिष्ठों के पूरे सहयोग के चलते दफ़्तर में काम तेज़ रफ़्तार पकड़ लेगा। यह दिन बेहतरीन दिनों में से एक हो सकता है। आज दिन में आप कई अच्छे प्लान भविष्य के लिए बना सकते हैं लेकिन शाम के वक्त किसी दूर के रिश्तेदार के घर में आ जाने के कारण आपके सारे प्लान धरे के धरे रह सकते हैं। रिश्तेदारों को लेकर जीवनसाथी के साथ नोंकझोंक हो सकती है।
धनु-ये यो भा भी भू धा फा ढ़ा भे)
आज अपने ख़राब मूड को शादीशुदा ज़िंदगी में तनाव का कारण न बनने दें। इससे बचने की कोशिश करें, नहीं तो बाद में पछताना पड़ेगा। आज के दिन आपको आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। संभव है कि आप ज़रूरत से ज़्यादा ख़र्च करें या आपका बटुआ खो भी सकता है- ऐसे मामलों में सावधानी की कमी आपको नुक़सान पहुँचा सकती है। पिता का तल्ख़ बर्ताव आपको नाराज़ कर सकता है। लेकिन हालात को नियंत्रण में रखने के लिए शांत रहें। इससे आपको फ़ायदा होगा। आपका व्यवसाय और मोल-भाव करने की क्षमता फ़ायदेमंद साबित होगी। सेमिनार और प्रदर्शनी आदि आपको नई जानकारियाँ और तथ्य मुहैया कराएंगे। आपका जीवनसाथी बिना जाने कुछ ऐसा ख़ास काम कर सकता है, जिसे आप कभी भुला नहीं पाएंगे।
मकर- (भो जा जी खी खू खे खो गा गी)
आज कोई शारीरिक पीड़ा आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। तुरंत आराम पाने के लिए अच्छे चिकित्सक की सलाह लेने में कोताही न बरतें। आपकी कोई पुरानी बीमारी आज आपको परेशान कर सकती है जिसकी वजह से आपको हॉस्पिटल भी जाना पड़ सकता है और आपका काफी धन भी खर्च हो सकता है। जिन लोगों से आपकी मुलाक़ात कभी-कभी ही होती है, उनसे बातचीत और संपर्क करने के लिए अच्छा दिन है। प्रेम-संबंध में ग़ुलाम की तरह व्यवहार न करें। अपनी विशेषज्ञता का उपयोग पेशेवर मामलों को सहजता से सुलझाने में करें। अपने किसी मित्र के साथ आज समय बिता सकते हैं लेकिन इस दौरान आपको शराब का सेवन करने से बचना चाहिए नहीं तो समय की बर्बादी हो सकती है। परिवार के सदस्यों के साथ थोड़ी दिक़्क़त का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन दिन के आख़िर में आपका जीवनसाथी आपकी परेशानियों को समझेगा।
कुंभ- (गू गे गो सा सी सू से सो द)
आज आपको अपनी सेहत के प्रति ज़्यादा सावधानी बरतने की ज़रूरत है, ख़ास तौर पर रक्तचाप के मरीज़ों को। आप ख़ुद को नए रोमांचक हालात में पाएंगे- जो आपको आर्थिक फ़ायदा पहुँचाएंगे। भावनात्मक तौर पर ख़तरा उठाना आपके पक्ष में जाएगा। अपने साथी को भावनात्मक तौर पर ब्लैकमेल करने से बचें। किसी लघु या मध्यावधि पाठ्यक्रम में दाखिला लेकर अपनी तकनीकी क्षमताओं में निखार लाएँ। घर के कामों को पूरा करने के बाद इस राशि की गृहणियां आज के दिन फुर्सत में टीवी या मोबाइल पर कोई मूवी देख सकती हैं। जीवनसाथी की ख़राब सेहत के चलते आप चिंताग्रस्त हो सकते हैं।
मीन- (दी दू थ झ ञ दे दो च ची)
आज के दिन आपको ऐसी चीज़ों पर काम करने की ज़रूरत है, जो आपकी सेहत में सुधार ला सकती हैं। जिन लोगों ने किसी से उधार लिया है उन्हें आज किसी भी हालत में उधार चुकाना पड़ सकता है जिससे आर्थिक स्थिति थोड़ी कमजोर हो जाएगी। कोई चिट्ठी या ई-मेल पूरे परिवार के लिए अच्छी ख़बर लाएगी। प्रेमी एक-दूसरे की पारिवारिक भावनाओं को समझेंगे। आज आप दूसरे दिनों की तुलना में अपने लक्ष्यों को कुछ ज़्यादा ही ऊँचा तय कर सकते हैं। अगर परिणाम आपकी उम्मीद के मुताबिक़ न आए, तो निराश न हों। आपका जीवनसाथी बिना जाने कुछ ऐसा ख़ास काम कर सकता है, जिसे आप कभी भुला नहीं पाएंगे।
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